maqsad ki aankh ka noor | मक़्सद की आँख का नूर

  - Uzma Naqvi
मक़्सदकीआँखकानूर
आख़िरहमारीनिय्यतोंमेंहीचमकताहै
मुंजमिदहोनेकेडरसे
मुझेआनेवालेमेहमानोंकाइंतिज़ारज़ियादाकरनाहोगा
मेरीहलावतमेरीरगोंमेंमचलरहीहै
एकमिठासभरीघुलावट
जोहलक़परलज़्ज़तकीदस्तकदेतीहै
मैंफ्रीजमेंपड़ी
अपनीकरवटोंमेंइतरारहीहूँ
जिसकेनुक़ूशबिलोरींबोतलपररक़्सकरतेहैं
आनेवालोंकाइंतिज़ारलम्बाहोरहाहै
मेरीरगोंमेंबुरूदतजमरहीहै
ख़ालीहोनेकाशौक़बड़ाज़ालिमहोताहै
मगरयेक्या
येआवाज़कैसी
आजमेहमाननहींरहे
क्यामेरीमुरादऔरमेराशे'रबाक़ीरहेगा
  - Uzma Naqvi
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