mujh ko majboor-e-sar-kashi kahiye | मुझ को मजबूर-ए-सर-कशी कहिए

  - Urooj Zaidi Badayuni
मुझकोमजबूर-ए-सर-कशीकहिए
आपअँधेरेकोरौशनीकहिए
उनसेबछड़ातोइसअज़ाबमेंहूँ
मौतकहिएकिज़िंदगीकहिए
सर-ए-साहिलभीलोगप्यासेहैं
इसकोआशोब-ए-तिश्नगीकहिए
क्यूँँतजाहुलकोआरिफ़ानाकहूँ
मेरेचेहरेकोअजनबीकहिए
चारदिनकीहैचाँदनीलेकिन
चाँदनीहैतोचाँदनीकहिए
मौतभीज़िंदगीकाइकरुख़है
इसकोमेआ'र-ए-आगहीकहिए
ग़मसेहमबे-मज़ानहींहोते
लज़्ज़त-ए-ग़मकोचाशनीकहिए
मुझकोबख़्शीहैफ़िक्र-ए-अर्ज़-ओ-समा
दोस्तकीबंदा-परवरीकहिए
जलता-बुझतायेकिर्मक-ए-शब-ताब
उसकोपुर-कार-ए-सादगीकहिए
मुझकोमुड़मुड़केदेखनेवाले
क्याइसेतर्ज़-ए-बे-रुख़ीकहिए
धूपमेंसाथसाथसायाहै
रौशनीमेंभीतीरगीकहिए
रहबरीभीहैहम-रकाब-ए-उरूज
उसकोफ़ैज़ान-ए-ख़ुद-रवीकहिए
  - Urooj Zaidi Badayuni
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