ishq ke haathon men parcham ke siva kuchh bhi nahinus ka aalam tere aalam ke siva kuchh bhi nahin | इश्क़ के हाथों में परचम के सिवा कुछ भी नहीं

  - Urooj Zaidi Badayuni
इश्क़केहाथोंमेंपरचमकेसिवाकुछभीनहीं
उसकाआलमतेरेआलमकेसिवाकुछभीनहीं
बे-यक़ीनीसू-ए-ज़नईमान-ए-नाक़िसकीदलील
फ़िक्र-ए-राहतखतरा-ए-ग़मकेसिवाकुछभीनहीं
हमसेपूछोहमबताएँग़ायत-ए-कौन-ओ-मकाँ
कारगाह-ए-इब्न-ए-आदमकेसिवाकुछभीनहीं
आतिश-ए-नफ़रतसेअबदुनियाहैऐसेमोड़पर
दीदा-वरगोयेजहन्नमकेसिवाकुछभीनहीं
याद-ए-अय्या
मेंकियेभीजान-ए-रज़्म-ओ-बज़्मथे
जिनकेपासअबचश्म-ए-पुर-नमकेसिवाकुछभीनहीं
हमनहींमिनजुमलाअहल-ए-रज़ाक्यूँँकरकहें
जिनकेलबपरक़िस्सा-ए-ग़मकेसिवाकुछभीनहीं
अहल-ए-दुनियाकेलिएजोअब्र-ए-नैसाँथा'उरूज'
अबवोइंसाँअश्क-ए-शबनमकेसिवाकुछभीनहीं
  - Urooj Zaidi Badayuni
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