paa-e-talb ki manzil ab tak vahii gali hai | पा-ए-तलब की मंज़िल अब तक वही गली है

  - Urooj Zaidi Badayuni
पा-ए-तलबकीमंज़िलअबतकवहीगलीहै
आग़ाज़भीयहीथाअंजामभीयहीहै
जिसदास्तान-ए-ग़मकाउनवानरौशनीहै
हरलफ़्ज़कीसियाहीख़ुदमुँहसेबोलतीहै
तर्ज़-ए-तपाकक़ाएमलुत्फ़-ए-नज़रवहीहै
लेकिनयेवाक़िआ'हैफिरभीकोईकमीहै
उनकीनज़रसेदिलकीयेबहसहोरहीहै
क्याचीज़ज़िंदगीमेंमक़्सूद-ए-ज़िंदगीहै
हरलग़्ज़िश-ए-बशरपरतन्क़ीदकरनेवालो
तुमयेभुलाचुकेहोइंसानआदमीहै
येसाज़िश‌‌‌‌-ए-तग़य्युरहैकितनीजान-लेवा
मुझकोजगाकेमेरीतक़दीरसोगईहै
हाँमेरेवास्तेहैतख़सीसकायेपहलू
दुनियासमझरहीहैअंदाज़-ए-बेरुख़ीहै
मुमकिननहींकिदामनबे-दाग़होकिसीका
सचपूछिएतोदुनियाकाजलकीकोठरीहै
ताबिंदाहर-नफ़सहैउम्मीदकीबदौलत
मेहराब-ए-ज़िंदगीमेंइकशम्अ'जलरहीहै
देखेतोकोईशान-ए-सहर-ए-निगाह-ए-साक़ी
साग़रमेंखिंचकेरूह-ए-मय-ख़ानागईहै
वाबस्ता-ए-नफ़सहैनज़्म-ओ-निज़ाम-ए-हस्ती
या'नीहवापेक़ाएमबुनियाद-ए-ज़िंदगीहै
कबतकयेख़्वाब-ए-ग़फ़लतजागो'उरूज'जागो
अबधूपबढ़तेबढ़तेसरपरहीगईहै
  - Urooj Zaidi Badayuni
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