तकलीफ़-ए-इल्तिफ़ात-ए-गुरेज़ाँकभीकभी
यूँँभीहुईहैपुर्सिश-ए-पिन्हाँकभीकभी
मेराज-ए-दीदजल्वा-ए-जानाँकभीकभी
हमभीरहेहैंनाज़िश-ए-दौराँकभीकभी
येऔरबातरब्त-ए-मुसलसलनकहसकें
चूमाहैहमनेदामन-ए-जानाँकभीकभी
नक़्श-ए-ख़यालआपकीतस्वीरबनगया
येमो'जिज़ाहुआहैनुमायाँकभीकभी
बंदा-नवाज़ी-ए-करम-ए-गाहगाहसे
हमभीथेकायनात-ब-दामाँकभीकभी
लग़्ज़िशकीबातविरसा-ए-आदमकीबातहै
खाताहैठोकरेंदिल-ए-इंसाँकभीकभी
करवटबदलगईहैतिरीवज़-ए-इल्तिफ़ात
देखाहैयेभीख़्वाब-ए-परेशाँकभीकभी
येसर-कशीकेनामसेमंसूबहीसही
होताहैदिलभीसर-ब-गरेबाँकभीकभी
अक्सरनशात-ए-सैर-ए-गुलिस्तान-ए-बे-ख़िज़ाँ
अंदाज़ा-ए-फ़रेब-ए-बहाराँकभीकभी
मेरेलबोंपेमौज-ए-तबस्सुमकेबावजूद
ग़महोगयाहैरुख़सेनुमायाँकभीकभी
कहनापड़ाहैजल्वा-ए-सद-रंगरोकिए
नज़रेंहुईहैंइतनीपरेशाँकभीकभी
ख़ुदअपनेआस-पासअँधेरोंकोदेखकर
घबराउठीहैसुब्ह-ए-बहाराँकभीकभी
दामनबचाकेहमतोगुज़रजाएँऐ'उरूज'
ख़ुदछेड़तीहैगर्दिश-ए-दौराँकभीकभी