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Upendra Bajpai
KHushi pa lene ki utni na hogii
KHushi pa lene ki utni na hogii | ख़ुशी पा लेने की उतनी न होगी
- Upendra Bajpai
ख़ुशी
पा
लेने
की
उतनी
न
होगी
तुझे
खोने
का
डर
जितना
बड़ा
है
- Upendra Bajpai
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अपनी
तन्हाई
मिरे
नाम
पे
आबाद
करे
कौन
होगा
जो
मुझे
उस
की
तरह
याद
करे
Parveen Shakir
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ज़िंदगी
भर
वो
उदासी
के
लिए
काफ़ी
है
एक
तस्वीर
जो
हँसते
हुए
खिंचवाई
थी
Yasir Khan
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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अज़ल
से
ले
कर
के
आज
तक
मैं
कभी
भी
तन्हा
नहीं
रहा
हूँ
कभी
थे
तुम
तो,
कभी
थी
दुनिया,
कभी
ये
ग़ज़लें,
कभी
उदासी
Ankit Maurya
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जाने
से
कोई
फ़र्क़
ही
उसके
नहीं
पड़ा
क्या
क्या
समझ
रहा
था
बिछड़ने
के
डर
को
मैं
Shariq Kaifi
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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मैं
आँखें
बंद
करके
देखता
हूँ
मैं
जब
मर
जाऊँगा
कैसा
लगूँगा
Upendra Bajpai
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आप
अपना
लहू
बहा
कर
के
अपने
आँसू
बचा
रहें
हैं
हम
ज़िन्दगी
इक
मज़ाक
है,जिसकी
जमके
खिल्ली
उड़ा
रहें
हैं
हम
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Upendra Bajpai
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मेरी
सिगरेट
ही
मेरी
दुनिया
है
इस
में
माचिस
लगा
रहा
हूँ
मैं
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Upendra Bajpai
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अब
तो
दोनों
के
मुक़द्दर
ही
आज़माने
हैं
है
बॉल
आख़िरी
और
सात
रन
बनाने
हैं
Upendra Bajpai
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मौत
के
बाद
का
मंज़र
न
बयाँ
हो
जैसे
ऐसे
मुश्किल
है
ज़माने
से
तेरा
दुख
कहना
Upendra Bajpai
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