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Upendra Bajpai
maut ke baad ka manzar na bayaañ ho jaise
maut ke baad ka manzar na bayaañ ho jaise | मौत के बाद का मंज़र न बयाँ हो जैसे
- Upendra Bajpai
मौत
के
बाद
का
मंज़र
न
बयाँ
हो
जैसे
ऐसे
मुश्किल
है
ज़माने
से
तेरा
दुख
कहना
- Upendra Bajpai
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वो
आँखें
बुझ
चुकी
होंगी
नज़ारा
हो
चुका
होगा
'अली'
वो
शख़्स
अब
दुनिया
को
प्यारा
हो
चुका
होगा
Ali Zaryoun
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काश
ऐसा
कोई
मंज़र
होता
मेरे
काँधे
पे
तेरा
सर
होता
Tahir Faraz
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एक
दफ़ा
बस
वापस
मंज़र
ऐसा
हो
हाथ
मेरा
सीधा
और
उल्टा
तेरा
हो
Tanoj Dadhich
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जैसा
मूड
हो
वैसा
मंज़र
होता
है
मौसम
तो
इंसान
के
अंदर
होता
है
Aziz Ejaaz
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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इश्क़
का
ज़ौक़-ए-नज़ारा
मुफ़्त
में
बदनाम
है
हुस्न
ख़ुद
बे-ताब
है
जल्वा
दिखाने
के
लिए
Asrar Ul Haq Majaz
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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और
भी
दुनिया
में
मंज़र
ख़ूब-सूरत
हैं
मगर
तेरी
ज़ुल्फ़ों
झटकने
से
सुहाना
कुछ
नहीं
Alankrat Srivastava
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खिला
कर
भंग
की
गुजिया
समा
रंगीन
कर
दो
तुम
बड़ी
मुश्क़िल
से
तो
हो
पाया
है
दीदार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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जिसको
रखा
है
मैंने
सर-आंखों
पे
उसने
मुझको
वेटिंग
लिस्ट
में
रखा
है
Upendra Bajpai
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रश्क़
होता
है
चूमते
हैं
गाल
तेरे
झुमके
रक़ीब
हैं
मेरे
Upendra Bajpai
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मौत
से
करके
दोस्ती
हम
भी
ज़ीस्त
से
इंतिक़ाम
लेते
हैं
Upendra Bajpai
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चल
पड़ा
था
देखकर
मैं
मौत
का
रस्ता
खुला
ऐन
वक़्त-ए-ख़ुदकुशी
पंखे
से
पर
फंदा
खुला
और
फिर
इक
रोज़
उसने
लब
मेरे
लब
पे
रखे
और
फिर
इक
रोज़
मुझपे
मीर
का
मिसरा
खुला
मुझको
रोता
देखने
की
चाह
थी
उसकी
सो
अब
छोड़
देता
हूँ
मैं
अक्सर
रात
दरवाज़ा
खुला
और
फिर
इक
दिन
किसी
से
चैट
उसकी
देख
ली
और
फिर
इक
दिन
हमारी
अक्ल
का
ताला
खुला
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Upendra Bajpai
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गाँव
का
वो
लड़का
जो
सब
में
अव्वल
था
सिगरेट
पीते-पीते
इक
दिन
मर
जाएगा
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Upendra Bajpai
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