kisi se aur to kya guftugoo karen dil ki | किसी से और तो क्या गुफ़्तुगू करें दिल की

  - Ummeed Fazli
किसीसेऔरतोक्यागुफ़्तुगूकरेंदिलकी
किरातसुनसकेहमभीधड़कनेंदिलकी
मगरयेबातख़िरदकीसमझमेंसकी
विसाल-ओ-हिज्रसेआगेहैंमंज़िलेंदिलकी
जिलौमेंख़्वाब-नुमारत-जगेसजाएहुए
कहाँकहाँलिएफिरतीहैंवहशतेंदिलकी
निगाहमिलतेहीरंग-ए-हयाकीसूरतहैं
छलकउठींतिरेरुख़सेलताफ़तेंदिलकी
निगाह-ए-कमभीउसेसंगसेज़ियादाहै
किआइनेसेसिवाहैंनज़ाकतेंदिलकी
दयार-ए-हर्फ़-ओ-नवामेंकोईतोऐसाहो
कभीकिसीसेतोहमबातकरसकेंदिलकी
सर-ए-जरीदा-ए-हस्तीहमारेबाद'उमीद'
लहूसेकौनलिखेगाइबारतेंदिलकी
  - Ummeed Fazli
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