hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Umar Farhat
hai koi aur bhi jahaan men kya
hai koi aur bhi jahaan men kya | है कोई और भी जहान में क्या
- Umar Farhat
है
कोई
और
भी
जहान
में
क्या
मैं
नहीं
हूँ
तिरे
गुमान
में
क्या
तू
ने
फ़ितराक
साथ
तो
रखा
तीर
भी
है
तिरी
कमान
में
क्या
एक
साया
था
दिल
में
वो
भी
बुझा
रह
गया
है
अब
इस
मकान
में
क्या
ज़ेर-ए-साया
है
और
सभी
दुनिया
हम
नहीं
हैं
तिरी
अमान
में
क्या
कोई
भी
तुझ
से
बात
करता
नहीं
ज़हर
सा
है
तिरी
ज़बान
में
क्या
- Umar Farhat
Download Ghazal Image
गुलाब
ख़्वाब
दवा
ज़हर
जाम
क्या
क्या
है
मैं
आ
गया
हूँ
बता
इंतिज़ाम
क्या
क्या
है
Rahat Indori
Send
Download Image
255 Likes
मैंने
जो
कुछ
भी
सोचा
हुआ
है,
मैं
वो
वक़्त
आने
पे
कर
जाऊँगा
तुम
मुझे
ज़हर
लगते
हो
और
मैं
किसी
दिन
तुम्हें
पी
के
मर
जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
279 Likes
मर
चुका
है
दिल
मगर
ज़िंदा
हूँ
मैं
ज़हर
जैसी
कुछ
दवाएँ
चाहिए
पूछते
हैं
आप
आप
अच्छे
तो
हैं
जी
मैं
अच्छा
हूँ
दुआएँ
चाहिए
Read Full
Jaun Elia
Send
Download Image
294 Likes
कुछ
तो
मिल
जाए
लब-ए-शीरीं
से
ज़हर
खाने
की
इजाज़त
ही
सही
Arzoo Lakhnavi
Send
Download Image
25 Likes
किस
तरह
मिरी
रूह
हरी
कर
गया
आख़िर
वो
ज़हर
जिसे
जिस्म
में
खिलते
नहीं
देखा
Parveen Shakir
Send
Download Image
27 Likes
हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
Send
Download Image
156 Likes
जो
ज़हर
पी
चुका
हूँ
तुम्हीं
ने
मुझे
दिया
अब
तुम
तो
ज़िन्दगी
की
दुआएँ
मुझे
न
दो
Ahmad Faraz
Send
Download Image
34 Likes
दिल
तुम्हारा
भी
किसी
से
लगे
तो
तुम
जानो
किस
तरह
हँसते
हुए
ज़हर
पिया
जाता
है
Harsh saxena
Send
Download Image
46 Likes
उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
Send
Download Image
27 Likes
मैं
ख़ुदा
का
नाम
ले
कर
पी
रहा
हूँ
दोस्तो
ज़हर
भी
इस
में
अगर
होगा
दवा
हो
जाएगा
Bashir Badr
Send
Download Image
33 Likes
Read More
जिस्म
सियाही
बनाऊँगा
तेरा
हर्फ़
सजाऊँगा
तू
बहता
पानी
बन
जा
मैं
मछली
बन
जाऊँगा
कल
मौसम
की
हथेली
पर
नाम
तिरा
खुदवाऊँगा
अपना
ग़ुबार
उड़ा
कर
मैं
कुछ
तस्वीर
बनाऊँगा
किसी
किवाड़
की
आड़
में
अब
तुझ
को
ला
के
छुपाऊँगा
तिरे
बदन
के
पानी
से
मैं
सूरज
चमकाऊँगा
Read Full
Umar Farhat
Download Image
0 Likes
सियह
चादर
में
लिपटा
है
फ़लक
से
चाँद
उतरा
है
नदी
में
डूबता
सूरज
कई
दिन
से
पिघलता
है
तुम्हारी
ज़ात
की
छत
पर
कोई
रस्सी
से
लटका
है
जगाओ
मत
उसे
'फ़रहत'
ये
उल्लू
शब
का
जागा
है
Read Full
Umar Farhat
Download Image
0 Likes
उल्टी
तस्वीर
पहन
कर
निकले
अपनी
तक़दीर
पहन
कर
निकले
उस
को
देखा
था
बहुत
आँखों
ने
ख़्वाब
ता'बीर
पहन
कर
निकले
फ़स्ल-ए-गुल
आ
गई
तो
पाँव
में
हम
भी
ज़ंजीर
पहन
कर
निकले
शे'र
हम
ने
भी
बहुत
लिख
डाले
कैसी
तश्हीर
पहन
कर
निकले
हर
तरफ़
अपनी
अलम-दारी
है
कैसे
ये
तीर
पहन
कर
निकले
साथ
देने
को
बहत्तर
का
'उमर'
हम
भी
शमशीर
पहन
कर
निकले
Read Full
Umar Farhat
Download Image
0 Likes
आसमाँ
हो
के
भी
ज़मीं
होना
इक
यही
है
तिरे
क़रीं
होना
सारी
दुनिया
पे
हर्फ़
आएगा
इस
क़दर
भी
न
तुम
हसीं
होना
वाक़िआ'
कुछ
अजीब
लगता
है
तेरा
आना
मिरा
कहीं
होना
अच्छे
वक़्तों
की
इक
निशानी
है
दोस्तों
का
बहुत
नहीं
होना
ख़ुश
दिनों
में
तुम्हें
‘उमर-फ़रहत'
देखा
जाता
नहीं
हज़ीं
होना
Read Full
Umar Farhat
Download Image
0 Likes
आसमाँ
से
उतरता
हुआ
एक
तारा
बुझाया
हुआ
आज
भी
रात
की
रानी
के
तन
से
है
नाग
लिपटा
हुआ
एक
पत्ता
किसी
शाख़
से
टूट
कर
आज
तन्हा
हुआ
काग़ज़ी
तन
है
उस
का
मगर
धूप
में
कब
से
झुलसा
हुआ
पहला
अक्षर
तिरे
नाम
का
रौशनी
से
है
लिक्खा
हुआ
Read Full
Umar Farhat
Download Image
0 Likes
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Neend Shayari
Kashti Shayari
Ujaala Shayari
Nafrat Shayari
Gulshan Shayari