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Toyesh prakash
koii kahe na kahe main to raaz khooloonunga
koii kahe na kahe main to raaz khooloonunga | कोई कहे न कहे मैं तो राज़ खोलूँगा
- Toyesh prakash
कोई
कहे
न
कहे
मैं
तो
राज़
खोलूँगा
तू
मेरा
प्यार
है
मैं
सबको
जा
के
बोलूँगा
- Toyesh prakash
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है
देखने
वालों
को
सँभलने
का
इशारा
थोड़ी
सी
नक़ाब
आज
वो
सरकाए
हुए
हैं
Arsh Malsiyani
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हम
पे
एहसान
हैं
उदासी
के
मुस्कुराएँ
तो
शर्म
आती
है
Varun Anand
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माना
कि
सब
के
सामने
मिलने
से
है
हिजाब
लेकिन
वो
ख़्वाब
में
भी
न
आएँ
तो
क्या
करें
Akhtar Shirani
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उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
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जो
तेरी
बाँहों
में
हँसती
रही
है
खेली
है
वो
लड़की
राज़
नहीं
है
कोई
पहेली
है
हाँ
मेरा
हाथ
पकड़
कर
झटक
दिया
उसने
सहारा
दे
के
बताया
कि
तू
अकेली
है
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Tajdeed Qaiser
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क्यूँँ
इक
तरफ़
निगाह
जमाए
हुए
हो
तुम
क्या
राज़
है
जो
मुझ
से
छुपाए
हुए
हो
तुम
Shakeel Badayuni
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लिपट
भी
जा
न
रुक
'अकबर'
ग़ज़ब
की
ब्यूटी
है
नहीं
नहीं
पे
न
जा
ये
हया
की
ड्यूटी
है
Akbar Allahabadi
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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इतनी
जल्दी
न
गिरा
अपने
हसीं
रुख़
पे
नक़ाब
तू
मुझे
ठीक
से
हैरान
तो
हो
लेने
दे
Rajesh Reddy
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मुँह
पर
नक़ाब-ए-ज़र्द
हर
इक
ज़ुल्फ़
पर
गुलाल
होली
की
शाम
ही
तो
सहर
है
बसंत
की
Lala Madhav Ram Jauhar
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ज़िंदगी
क्या
ज़िंदगी
है
वो
नहीं
तो
कुछ
कमी
है
आज
मुद्दत
से
ख़ुशी
है
बात
दिल
की
जो
कही
है
झूठे
वादे
देख
कर
तो
आरज़ू
मिटती
गई
है
फ़ोन
अब
तक
तो
न
आया
रात
कितनी
हो
गई
है
अब
ख़ुदी
की
धड़कनों
पर
लगता
है
वो
आ
रही
है
छुप
चुके
उस
में
कहीं
हम
वो
मगर
कब
ढूँढ़ती
है
दिन
गुज़रते
हैं,
अभी
यूँँ
जान
कर
वो
रूठती
है
हम
नहीं
उस
भीड़
में
जो
बोल
कर
कुछ
सोचती
है
खो
गए
इक
दूसरे
में
प्यार
जो
भी
है
यही
है
दोष
है
तोयेश
अपना
वो
कहाँ
कुछ
जानती
है
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Toyesh prakash
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हो
भले
तिनका
सही
वो
इस
नदी
हमको
तो
वो
इक
सहारा
लगता
है
Toyesh prakash
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जब
कभी
आफ़ताब
ढलता
है
दिल
मिरा
तुझ
सेे
मिलने
चलता
है
तूने
पूछा
तो
सोचता
हूँ
मैं
ख़्वाब
तेरा
ही
ख़्वाब
पलता
है
झूठ
है
ये
तू
दूर
है
मुझ
सेे
तू
मिरे
साथ
साथ
चलता
है
तू
जो
रोया
तो
मैं
भी
रोया
हूँ
दिल
सदा
दिल
से
ही
पिघलता
है
जी
ने
चाहा
है
देखना
है
तुझे
जी
कहाँ
टालने
से
टलता
है
उसने
बोला
तू
जब
भी
ग़ुस्सा
हो
मेरा
दिल
इस
तरह
भी
जलता
है
उसको
ही
देख
कर
लगा
मुझको
चाँद
दिन
में
भी
तो
निकलता
है
सोचता
है
नई
ग़ज़ल
अपनी
शाम
'तोयेश'
जब
टहलता
है
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Toyesh prakash
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वो
तो
ऐसे
टहल
रही
होगी
इक
नदी
जैसे
चल
रही
होगी
यूँँ
लगेगा
कि
आ
गया
मैं
घर
फिर
वो
आँखें
भी
मल
रही
होगी
इक
दफ़ा
देखलूँ
उसे
यकसाँ
एक
ख़्वाहिश
ये
पल
रही
होगी
आग
से
तो
बची
रही
होगी
आँसुओं
से
वो
जल
रही
होगी
दिल
ये
तोयेश
बोलता
है
बस
ये
कमी
उसकी
खल
रही
होगी
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Toyesh prakash
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हाल
न
दिल
का
कहना
आया
तो
चुप
रह
कर
हमको
सताया
Toyesh prakash
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