koi hamdard tum jaisa nahin hai | कोई हमदर्द तुम जैसा नहीं है

  - ABhishek Parashar
कोईहमदर्दतुमजैसानहींहै
वगरनाशहरमेंक्याक्यानहींहै
किसीकोदर्दअपनाक्याबताते
यहाँपरजबकोईअपनानहींहै
तुम्हारेबादगैरोंकेलिएफिर
हमारादिलकभीधड़कानहींहै
तुम्हारेपासहूँमैंछूकेदेखो
हक़ीक़तहैकोईसपनानहींहैं
मगरतुमएकदिनतोछोड़दोगे
मुझेइसख़ौफसेजीनानहींहै
रकीबोकोकहोदूरीबनालें
अगरउनकोअभीमरनानहींहै
मोहब्बतदेखलेकरकेकिसीसे
मोहब्बतकोअगरसमझानहींहै
तुम्हेंयेहुस्नतोमिलजाएँगेदिल
मगरबाज़ारमेंबिकतानहींहै
  - ABhishek Parashar
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