hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Tehzeeb Hafi
nahin aata kisi par dil hamaara
nahin aata kisi par dil hamaara | नहीं आता किसी पर दिल हमारा
- Tehzeeb Hafi
नहीं
आता
किसी
पर
दिल
हमारा
वही
कश्ती
वही
साहिल
हमारा
तेरे
दर
पर
करेंगे
नौकरी
हम
तेरी
गलियाँ
हैं
मुस्तक़बिल
हमारा
कभी
मिलता
था
कोई
होटलों
में
कभी
भरता
था
कोई
बिल
हमारा
- Tehzeeb Hafi
Download Ghazal Image
ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
22 Likes
उसे
ज़ियादा
ज़रूरत
थी
घर
बसाने
की
वो
आ
के
मेरे
दर-ओ-बाम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
Send
Download Image
31 Likes
मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
Send
Download Image
46 Likes
गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
Send
Download Image
9 Likes
तमाम
शहर
को
तारीकियों
से
शिकवा
है
मगर
चराग़
की
बैअत
से
ख़ौफ़
आता
है
Aziz Nabeel
Send
Download Image
18 Likes
ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
Send
Download Image
23 Likes
तेरे
दर
पर
तेरी
ख़ातिर
बता
ना
हमें
रोना
पड़े,
अच्छा
लगेगा?
Atul K Rai
Send
Download Image
53 Likes
और
हुआ
भी
ठीक
वो
ही
जिसका
डर
था
बोझ
इतना
रख
दिया
था
बुलबुले
पर
Siddharth Saaz
Send
Download Image
14 Likes
मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
Send
Download Image
36 Likes
तो
क्या
उसको
मैं
होंठों
से
बजाऊँ
तिरे
दर
पे
जो
घंटी
लग
गई
है
चराग़
उसने
मिरे
लौटा
दिए
हैं
अब
उसके
घर
में
बिजली
लग
गई
है
Read Full
Fahmi Badayuni
Send
Download Image
45 Likes
Read More
आज
जिन
झीलों
का
बस
काग़ज़
में
नक़्शा
रह
गया
एक
मुद्दत
तक
मैं
उन
आँखों
से
बहता
रह
गया
मैं
उसे
ना-क़ाबिल-ए-बर्दाश्त
समझा
था
मगर
वो
मेरे
दिल
में
रहा
और
अच्छा
ख़ासा
रह
गया
वो
जो
आधे
थे
तुझे
मिलकर
मुक़म्मल
हो
गए
जो
मुक़म्मल
था
वो
तेरे
ग़म
में
आधा
रह
गया
Read Full
Tehzeeb Hafi
Download Image
61 Likes
जब
उस
की
तस्वीर
बनाया
करता
था
कमरा
रंगों
से
भर
जाया
करता
था
पेड़
मुझे
हसरत
से
देखा
करते
थे
मैं
जंगल
में
पानी
लाया
करता
था
थक
जाता
था
बादल
साया
करते
करते
और
फिर
मैं
बादल
पे
साया
करता
था
बैठा
रहता
था
साहिल
पे
सारा
दिन
दरिया
मुझ
से
जान
छुड़ाया
करता
था
बिंत-ए-सहरा
रूठा
करती
थी
मुझ
से
मैं
सहरा
से
रेत
चुराया
करता
था
Read Full
Tehzeeb Hafi
Download Image
24 Likes
ख़्वाबों
को
आँखों
से
मिन्हा
करती
है
नींद
हमेशा
मुझ
सेे
धोखा
करती
है
उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वग़ैरा
करती
है
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
111 Likes
जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
87 Likes
इक
तेरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरज़ी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
45 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Ulfat Shayari
Ijazat Shayari
Satire Shayari
Musafir Shayari
Haalaat Shayari