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Tehzeeb Hafi
aaj jin jheelon ka bas kaaghaz men naksha rah gaya
aaj jin jheelon ka bas kaaghaz men naksha rah gaya | आज जिन झीलों का बस काग़ज़ में नक़्शा रह गया
- Tehzeeb Hafi
आज
जिन
झीलों
का
बस
काग़ज़
में
नक़्शा
रह
गया
एक
मुद्दत
तक
मैं
उन
आँखों
से
बहता
रह
गया
मैं
उसे
ना-क़ाबिल-ए-बर्दाश्त
समझा
था
मगर
वो
मेरे
दिल
में
रहा
और
अच्छा
ख़ासा
रह
गया
वो
जो
आधे
थे
तुझे
मिलकर
मुक़म्मल
हो
गए
जो
मुक़म्मल
था
वो
तेरे
ग़म
में
आधा
रह
गया
- Tehzeeb Hafi
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नहीं
है
लब
पे
दिखावे
का
भी
तबस्सुम
अब
हमें
किसी
ने
मुक़म्मल
उदास
कर
दिया
है
Amaan Haider
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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उदासी
पर
कहे
हैं
शे'र
सबने
उदासी
को
जिया
कितनों
ने
लेकिन
?
Tanoj Dadhich
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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अपने
दीवाने
को
देकर
दर्द
ओ
ग़म
नाज़
ख़ुद
पे
किस
क़दर
करता
है
वो
Ajeetendra Aazi Tamaam
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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मेरे
तो
ग़म
भी
ज़माने
के
काम
आते
हैं
मैं
रो
पड़ूँ
तो
कई
लोग
मुस्कुराते
हैं
Tariq Qamar
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दुनिया
ने
तेरी
याद
से
बेगाना
कर
दिया
तुझ
से
भी
दिल-फ़रेब
हैं
ग़म
रोज़गार
के
Faiz Ahmad Faiz
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आधी
से
ज़ियादा
शब-ए-ग़म
काट
चुका
हूँ
अब
भी
अगर
आ
जाओ
तो
ये
रात
बड़ी
है
Saqib lakhanavi
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तेरी
तस्वीर
हट
जाएगी
लेकिन
नज़र
दीवार
पर
जाती
रहेगी
Tehzeeb Hafi
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इक
तिरा
हिज्र
दाइमी
है
मुझे
वर्ना
हर
चीज़
आरजी़
है
मुझे
एक
साया
मिरे
तआकुब
में
एक
आवाज़
ढूँडती
है
मुझे
मेरी
आँखों
पे
दो
मुक़द
से
हाथ
ये
अँधेरा
भी
रौशनी
है
मुझे
मैं
सुख़न
में
हूँ
उस
जगह
कि
जहाँ
साँस
लेना
भी
शा'इरी
है
मुझे
इन
परिंदों
से
बोलना
सीखा
पेड़
से
ख़ामुशी
मिली
है
मुझे
मैं
उसे
कब
का
भूल-भाल
चुका
ज़िंदगी
है
कि
रो
रही
है
मुझे
मैं
कि
काग़ज़
की
एक
कश्ती
हूँ
पहली
बारिश
ही
आख़िरी
है
मुझे
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Tehzeeb Hafi
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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करता
नहीं
ख़याल
तेरा
इस
ख़याल
से
तंग
आ
गया
अगर
तू
मेरी
देखभाल
से
चल
मेरे
साथ
और
तबीयत
की
फ़िक्र
छोड़
दो
मील
दूर
है
मेरा
घर
अस्पताल
से
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Tehzeeb Hafi
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ये
एक
बात
समझने
में
रात
हो
गई
है
मैं
उस
से
जीत
गया
हूँ
कि
मात
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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