shahar ke deewar-o-dar par rut ki zardee chhaai thii | शहर के दीवार-ओ-दर पर रुत की ज़र्दी छाई थी

  - Taj Saeed
शहरकेदीवार-ओ-दरपररुतकीज़र्दीछाईथी
हरशजरहरपेड़कीक़िस्मतमेंअबतन्हाईथी
जीनेवालोंकामुक़द्दरशोहरतेंबनतीरहीं
मरनेवालोंकेलिएअबदश्तकीतन्हाईथी
चश्म-पोशीकाकिसीज़ी-होशकोयाराथा
रुतसलीब-ओ-दारकीइसशहरमेंफिरआईथी
मैंनेज़ुल्मतकेफ़ुसूँसेभागनाचाहामगर
मेरेपीछेभागतीफिरतीमिरीरुस्वाईथी
बारिशोंकीरुतमेंकोईक्यालिखेआख़िर'सईद'
लफ़्ज़केचेहरोंकीरंगतभीबहुतधुँदलाईथी
  - Taj Saeed
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