jo andheri chat pe khayal hain unhen raushni men utaar le | जो अँधेरी छत पे ख़याल हैं उन्हें रौशनी में उतार ले

  - Tahir Saood Kiratpuri
जोअँधेरीछतपेख़यालहैंउन्हेंरौशनीमेंउतारले
येजोहुस्नहैतिरीसोचमेंउसेशा'इरीमेंउतारले
सुख़न-शनास-ए-जदीदसुनकोईहर्फ़तुझसेछूटजाए
जोमर्सियाकोक़ुबूलहोउसेरुख़्सतीमेंउतारले
तुझेज़िंदगीकिसीमोड़परकोईकामआएतोफ़ोनकर
मिरेनम्बरातसँभालकरकिसीडाइरीमेंउतारले
तिरेनामकोतिरेदुश्मनाँलब-ए-आसमानपेपाएँगे
येजोगुफ़्तुगूमेंजुनूनहैउसेख़ामुशीमेंउतारले
ज़राफ़ारसीकेइमामसुनमैंज़बान-ए-हिन्दमेंहूँतोक्या
मैंतिरेमिज़ाजकालफ़्ज़हूँमुझेफ़ारसीमेंउतारले
येजोऊँचेऊँचेमकानहैंउन्हेंदेखकरमलूलहो
तिरासब्र-ओ-ज़ब्तनसीबहैदिल-ए-मुफ़्लिसीमेंउतारले
येयक़ीनशर्त-ए-यक़ीनहैवोअमीनहैवोअमीनहै
'सऊद'उसकोयक़ीनसेरग-ए-ज़िंदगीमेंउतारले
  - Tahir Saood Kiratpuri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy