talkh lahjaa jis ki fitrat hai usii naari ka bojh | तल्ख़ लहजा जिस की फ़ितरत है उसी नारी का बोझ

  - Tahir Saood Kiratpuri
तल्ख़लहजाजिसकीफ़ितरतहैउसीनारीकाबोझ
मैंउठाएफिररहाहूँज़ीस्तबेचारीकाबोझ
कटघरेमेंअद्लकीख़ातिरखड़ाहैबे-क़ुसूर
ढोरहाहैएकबेबसकबसेलाचारीकाबोझ
इसलिएपलभरकोमैंसोतानहींआरामसे
लेकेसोताहूँहमेशासरपेबेदारीकाबोझ
ज़िंदगीकैसेगुज़ारूँमैंतोइकमज़दूरहूँ
इकतरफ़बेटीकीशादीउसपेबीमारीकाबोझ
उसकोआँखोंनेनहींदेखातोयूँँलगतारहा
जैसेआँखोंकेसरोंपरहोजफ़ा-कारीकाबोझ
औरमतरक्खोमिरेकाँधोंपेज़िम्मेदारियाँ
पहलेहीकुछकमनहींहैरोटीतरकारीकाबोझ
तजरबेकेसाथकीजिएमिस्रा-ए-सानीक़ुबूल
सबसेभारीहैतोहैदुनियामेंख़ुद्दारीकाबोझ
बार-ए-फ़नढोनेकीताक़तदेवगर्नाकरीम
ना-तवाँकैसेउठासकताहैफ़नकारीकाबोझ
बादशाह-ए-वक़्तहैंबे-फ़िक्रऔरताहिर-'सऊद'
नौजवाँदिलपरलिएफिरतेहैंबेकारीकाबोझ
  - Tahir Saood Kiratpuri
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