jo shajar be-libaas rahte hain | जो शजर बे-लिबास रहते हैं

  - Tahir Faraz
जोशजरबे-लिबासरहतेहैं
उनकेसाएउदासरहतेहैं
चंदलम्हातकीख़ुशीकेलिए
लोगबरसोंउदासरहतेहैं
इत्तिफ़ाक़नजोहँसलिएथेकभी
इंतिक़ामनउदासरहतेहैं
मेरीपलकेंहैंऔरअश्कतिरे
पेड़दरियाकेपासरहतेहैं
उनकेबारेमेंसोचिए'ताहिर'
जोमुसलसलउदासरहतेहैं
  - Tahir Faraz
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