shabaab-e-mausam hare chaman men utaarna hai | शबाब-ए-मौसम हरे चमन में उतारना है

  - Tahir Adeem
शबाब-ए-मौसमहरेचमनमेंउतारनाहै
कमालजितनाभीहैसुख़नमेंउतारनाहै
ख़ुदा-ए-फ़नतूमिरेक़लममेंउतरकिमैंने
किसीकोग़ज़लोंकेपैरहनमेंउतारनाहै
वोजितनासोनाभीकोह-ए-सरमेंपड़ाहुआहै
बनाकेकुंदनकिसीबदनमेंउतारनाहै
निखारदेजोमिरीनज़रकेतमाममंज़र
वोनूरसरकेउजाड़-बनमेंउतारनाहै
अभीसेज़ुल्मत-कदेमेंथककरनिढालहोतुम
अभीतोसूरजकिरनकिरनमेंउतारनाहै
येअपनीफ़ितरतहैयाकिसादा-दिलीहैयारो
जोहँसकेबोलेउसेभीमनमेंउतारनाहै
हमेंख़बरहैकिक्याहैयेशग़्ल-ए-शेर-गोई
किरेशारेशाजिगरकाफ़नमेंउतारनाहै
किसीको'ताहिर-अदीम'मसनदयेसौंपनीहै
किसीकोदिलकेअकेले-पनमेंउतारनाहै
  - Tahir Adeem
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