maujoodgi ka us ki yahaañ e'tiraaf kar | मौजूदगी का उस की यहाँ ए'तिराफ़ कर

  - Tahir Adeem
मौजूदगीकाउसकीयहाँए'तिराफ़कर
काबा-ए-जहाँमिरेदिलकातवाफ़कर
कबतकफ़ुसूँमेंमौसम-ए-यकसानियतरहे
राइज-उल-जहाननयाइंकिशाफ़कर
इसतल्ख़ी-ए-हयातकेलम्होंकाहरक़ुसूर
मैंनेमुआ'फ़करदियातूभीमुआ'फ़कर
पर्दापड़ाहैशहरकीजबआँखआँखपर
तेराभीहक़हैसचसेमिरेइख़्तिलाफ़कर
मैंसचहूँऔरसामनेतेरेखड़ाहूँमैं
करनाहैमेरीज़ातसेअबइंहिराफ़कर
मैंख़ुदपेओढ़ताहूँतिरेप्यारकीरिदा
तूख़ुदपेमेरीचाहकाउजलाग़िलाफ़कर
लेएकएकशख़्समिराहम-ज़बानहै
जाएकएकशख़्सकोमेरेख़िलाफ़कर
तबअक्सअक्सउजलानज़रआएगातुझे
तूआइना-ए-दिलपेजमीगर्दसाफ़कर
बनकरशुआ'-ए-शीशा-ए-मंशूरदिलपेपड़
रंगोंकाइकजहानलिएइनएताफ़कर
चादरतमाज़तोंकीलिएदिनकेदिलमेंचल
तन्हाइयोंकोशबकेजिगरमेंलिहाफ़कर
इसमोहर-बंदइश्क़कोतूभीहवालगा
'ताहिर-अदीम'तूभीकोईइकतिशाफ़कर
  - Tahir Adeem
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