dhoop ke bheetar chhup kar nikli | धूप के भीतर छुप कर निकली

  - Swapnil Tiwari
धूपकेभीतरछुपकरनिकली
तारीकीसायोंभरनिकली
रातगिरीथीइकगढ्ढेमें
शामकाहाथपकड़करनिकली
रोयाउससेमिलकररोया
चाहतभेसबदलकरनिकली
फूलतोफूलोंसाहोनाथा
तितलीकैसीपत्थरनिकली
सूतहैंघरकेहरकोनेमें
मकड़ीपूरीबुनकरनिकली
ताज़ा-दमहोनेकोउदासी
लेकरग़मकाशावरनिकली
जाँनिकलीउसकेपहलूमें
वोहीमेरामगहरनिकली
हिज्रकीशबसेघबरातेथे
यारयहीशबबेहतरनिकली
जबभीचोरमिरेघरआए
एकहँसीहीज़ेवरनिकली
'आतिश'कुंदनरूहमिलीहै
उम्रकीआगमेंजलकरनिकली
  - Swapnil Tiwari
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