shaam ko kamre talak to is tarah aata hooñ main | शाम को कमरे तलक तो इस तरह आता हूँ मैं

  - SUMIT KUMAR GUPTA
शामकोकमरेतलकतोइसतरहआताहूँमैं
दुनियासेकटताहुआख़ुदमेंसिमटजाताहूँमैं
ज़िन्दगीकीकश्मकशपागलबनादेगीमुझे
चीखताहूँबापपरबच्चोंपेचिल्लाताहूँमैं
सुब्हबिछजाताहूँमैंबाज़ारमेंबाहरनिकल
शामअपनेआपकोअपनेमेंभरलाताहूँमैं
आजभीइकशख़्सकेएहसानदिलपेदर्जहैं
आजभीइकशख़्ससेबोलूँतोहकलाताहूँमैं
ज़िक्रपहलेइश्क़काहोतोसिहरजाताहैमन
अपनेदिलकेआख़िरीकमरेसेघबराताहूँमैं
ज़िन्दगीअपनीउदासीपरलिखाइकगीतहै
जिसकोसबकेसामनेहँसतेहुएगाताहूँमैं
  - SUMIT KUMAR GUPTA
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