sulagti shab ke nazaare bula rahe hain tumhein | सुलगती शब के नज़ारे बुला रहे हैं तुम्हें

  - SUMIT KUMAR GUPTA
सुलगतीशबकेनज़ारेबुलारहेहैंतुम्हें
नदीकेशांतकिनारेबुलारहेहैंतुम्हें
हमारेबाग़मेंरंगततुम्हारेफूलसेथी
तुम्हारेहुस्नकेमारेबुलारहेहैंतुम्हें
हमारीछोड़ोहमारेहृदयकीचीखसुनो
चलीभीआओतुम्हारेबुलारहेहैंतुम्हें
येसर्दमाहहरारतयेकपकपाताबदन
फ़िज़ाकेसारेइशारेबुलारहेहैंतुम्हें
जोतुमनेहाथछुड़ायाअदबनेथामलिया
सोअबग़ज़लकेसहारेबुलारहेहैंतुम्हें
  - SUMIT KUMAR GUPTA
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