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Sohil Barelvi
koii nahin bachega jahaan-e-kharaab men
koii nahin bachega jahaan-e-kharaab men | कोई नहीं बचेगा जहान-ए-ख़राब में
- Sohil Barelvi
कोई
नहीं
बचेगा
जहान-ए-ख़राब
में
सब
को
सजा
मिलेगी
याँ
अपने
गुनाह
की
- Sohil Barelvi
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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तोड़
कर
तुझको
भला
मेरा
भी
क्या
बन
जाता
उल्टा
मैं
ख़ुद
की
मुहब्बत
प
सज़ा
बन
जाता
जितनी
कोशिश
है
तिरी
एक
तवज्जोह
के
लिए
उस
सेे
कम
में
तो
मैं
दुनिया
का
ख़ुदा
बन
जाता
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Ashutosh Vdyarthi
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हम
एक
रात
हुए
थे
क़रीब
और
क़रीब
फिर
उसके
बाद
का
क़िस्सा
गुनाह
जैसा
है
Aks samastipuri
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तेरी
ख़ुशबू
को
क़ैद
में
रखना
इत्रदानों
के
बस
की
बात
नहीं
Fahmi Badayuni
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सज़ा
सच
बोलने
की
यह
मिली
है
सभी
ने
कर
लिया
हम
से
किनारा
Meem Alif Shaz
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मसाइल
तो
बहुत
से
हैं
मगर
बस
एक
ही
हल
है
सहरस
शाम
तक
सर
मेरा
है
बेगम
की
चप्पल
है
मेरे
मालिक
भला
इस
सेे
बुरी
भी
क्या
सज़ा
होगी
मेरा
शादीशुदा
होना
ही
दोज़ख़
की
रिहर्सल
है
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Paplu Lucknawi
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जुर्म
में
शामिल
रहेंगे
खिड़कियाँ,
दीवार,
छत
और
फिर
औरत
की
अस्मत
कुंडियाँ
ले
जाएंगी
Ravi 'VEER'
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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निगाह-ए-शोख़
का
क़ैदी
नहीं
है
कौन
यहाँ
किसे
तमन्ना
नहीं
फूल
चूमने
को
मिले
Aks samastipuri
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दिल
में
किसी
के
राह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
कितना
हसीं
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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दिए
जाते
हैं
दस्तक
फिर
नए
दुख
उदासी
चार-सू
फैली
पड़ी
है
Sohil Barelvi
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नीला
पड़ा
बदन
तो
मुझे
इल्म
अब
हुआ
कुछ
साँप
पल
रहे
थे
मिरी
आस्तीन
में
Sohil Barelvi
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जब
मुझे
प्यार
की
ज़रूरत
थी
सब
के
सब
मर
गए
कहीं
जा
कर
Sohil Barelvi
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दरीचे
एक
मुद्दत
वा
रहे
हैं
वो
बोले
आ
रहे
अब
आ
रहे
हैं
बदन
का
ख़ून
थोड़ा
सा
मिला
कर
नया
पन
शा'इरी
में
ला
रहे
हैं
दिलों
को
थाम
कर
बैठो
कि
अब
हम
सुख़न
की
कैफ़ियत
में
आ
रहें
हैं
बहुत
गहराई
में
डुबकी
लगा
कर
तेरी
यादों
को
ऊपर
ला
रहे
हैं
दिलों
को
जीत
ते
हम
ही
अकेले
मोहब्बत
की
दिशा
में
जा
रहे
हैं
दुखों
के
इन
दिनों
बादल
हमारी
बरेली
पर
बहुत
मँडरा
रहे
हैं
ग़ज़ल
में
क़ैद
कर
के
आज
'सोहिल'
हम
अपना
दर्द
गाने
जा
रहे
हैं
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Sohil Barelvi
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जिस
ने
रोने
पे
कर
दिया
मजबूर
उस
के
कहने
पे
मुस्कुराता
हूँ
Sohil Barelvi
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