dariche ek muddat vaa rahe hain | दरीचे एक मुद्दत वा रहे हैं

  - Sohil Barelvi
दरीचेएकमुद्दतवारहेहैं
वोबोलेरहेअबरहेहैं
बदनकाख़ूनथोड़ासामिलाकर
नयापनशा'इरीमेंलारहेहैं
दिलोंकोथामकरबैठोकिअबहम
सुख़नकीकैफ़ियतमेंरहेंहैं
बहुतगहराईमेंडुबकीलगाकर
तेरीयादोंकोऊपरलारहेहैं
दिलोंकोजीततेहमहीअकेले
मोहब्बतकीदिशामेंजारहेहैं
दुखोंकेइनदिनोंबादलहमारी
बरेलीपरबहुतमँडरारहेहैं
ग़ज़लमेंक़ैदकरकेआज'सोहिल'
हमअपनादर्दगानेजारहेहैं
  - Sohil Barelvi
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