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Sohil Barelvi
jahaan gussa aane lage aapko
jahaan gussa aane lage aapko | जहाँ ग़ुस्सा आने लगे आपको
- Sohil Barelvi
जहाँ
ग़ुस्सा
आने
लगे
आपको
वहीं
अपने
मन
के
क़दम
रोक
लो
- Sohil Barelvi
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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दो
दफ़ा
ग़ुस्सा
हुए
वो
एक
ग़लती
पर
मेरी
रात
की
रोटी
सवेरे
काम
में
लाई
गई
Tanoj Dadhich
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जो
रहे
थे
खफ़ा-खफ़ा
हम
सेे
कह
गए
हमको
बे-वफ़ा
हम
सेे
राह
तकते
रहे
थे
फिर
भी
वो
नईं
मिले
आख़िरी
दफ़ा
हम
सेे
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Shivam Mishra
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उदास
लोग
इसी
बात
से
हैं
ख़ुश
कि
चलो
हमारे
साथ
हुए
हादसों
की
बात
हुई
Abhishar Geeta Shukla
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गए
ज़माने
की
चाप
जिन
को
समझ
रहे
हो
वो
आने
वाले
उदास
लम्हों
की
सिसकियाँ
हैं
Aanis Moin
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हम
तो
कुछ
देर
हँस
भी
लेते
हैं
दिल
हमेशा
उदास
रहता
है
Bashir Badr
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उसकी
जुल्फ़ें
उदास
हो
जाए
इस-क़दर
रोशनी
भी
ठीक
नहीं
तुमने
नाराज़
होना
छोड़
दिया
इतनी
नाराज़गी
भी
ठीक
नहीं
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Fahmi Badayuni
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उदासी
जैसे
कि
उसके
बदन
का
हिस्सा
है
अधूरा
लगता
है
वो
शख़्स
अगर
उदास
न
हो
Vikram Sharma
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अभी
से
मेरे
रफ़ूगर
के
हाथ
थकने
लगे
अभी
तो
चाक
मिरे
ज़ख़्म
के
सिले
भी
नहीं
ख़फ़ा
अगरचे
हमेशा
हुए
मगर
अब
के
वो
बरहमी
है
कि
हम
से
उन्हें
गिले
भी
नहीं
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Parveen Shakir
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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छोड़
जाता
मुझे
वो
ख़ुद
इक
दिन
ख़्वाह-मख़ाह
मैं
ने
जल्दबाज़ी
की
Sohil Barelvi
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ऐसा
न
हो
कि
मैं
तुझे
दिल
से
उतार
दूँ
जो
कर
चुका
है
मुझ
पे
वो
एहसान
मत
गिना
Sohil Barelvi
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दरीचे
एक
मुद्दत
वा
रहे
हैं
वो
बोले
आ
रहे
अब
आ
रहे
हैं
बदन
का
ख़ून
थोड़ा
सा
मिला
कर
नया
पन
शा'इरी
में
ला
रहे
हैं
दिलों
को
थाम
कर
बैठो
कि
अब
हम
सुख़न
की
कैफ़ियत
में
आ
रहें
हैं
बहुत
गहराई
में
डुबकी
लगा
कर
तेरी
यादों
को
ऊपर
ला
रहे
हैं
दिलों
को
जीत
ते
हम
ही
अकेले
मोहब्बत
की
दिशा
में
जा
रहे
हैं
दुखों
के
इन
दिनों
बादल
हमारी
बरेली
पर
बहुत
मँडरा
रहे
हैं
ग़ज़ल
में
क़ैद
कर
के
आज
'सोहिल'
हम
अपना
दर्द
गाने
जा
रहे
हैं
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Sohil Barelvi
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याद-ए-माज़ी
के
सिवा
कुछ
नहीं
रहता
है
यहाँ
देखते
देखते
हर
साल
गुज़र
जाता
है
Sohil Barelvi
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तेरी
तस्वीर
देख
लेता
हूँ
अपनी
तक़दीर
देख
लेता
हूँ
क़ैद-ख़ानों
की
याद
आती
है
जब
भी
ज़ंजीर
देख
लेता
हूँ
भूल
जाता
हूँ
ख़ुद
को
जब
भी
मैं
तेरी
तहरीर
देख
लेता
हूँ
सुब्ह
भी
शायराना
लगती
है
ख़्वाब
में
मीर
देख
लेता
हूँ
ख़्वाब
पूरे
नहीं
जो
हो
पाए
उन
की
ता'बीर
देख
लेता
हूँ
आप
भी
चल
दिए
यहाँ
से
अब
मैं
भी
तदबीर
देख
लेता
हूँ
आज
भी
टोकता
हूँ
ख़ुद
को
मैं
जब
भी
तक़्सीर
देख
लेता
हूँ
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Sohil Barelvi
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