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Shivam Mishra
jo rahe the khafa-khafa hamse
jo rahe the khafa-khafa hamse | जो रहे थे खफ़ा-खफ़ा हम सेे
- Shivam Mishra
जो
रहे
थे
खफ़ा-खफ़ा
हम
सेे
कह
गए
हमको
बे-वफ़ा
हम
सेे
राह
तकते
रहे
थे
फिर
भी
वो
नईं
मिले
आख़िरी
दफ़ा
हम
सेे
- Shivam Mishra
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दिल
हिज्र
के
दर्द
से
बोझल
है
अब
आन
मिलो
तो
बेहतर
हो
इस
बात
से
हम
को
क्या
मतलब
ये
कैसे
हो
ये
क्यूँँकर
हो
Ibn E Insha
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अभी
तो
जान
कहता
फिर
रहा
है
तू
तुझे
हम
हिज्र
वाले
साल
पूछेंगे
Parul Singh "Noor"
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वो
आ
रहे
हैं,
वो
आते
हैं,
आ
रहे
होंगे
शब-ए-फ़िराक़
ये
कह
कर
गुज़ार
दी
हम
ने
Faiz Ahmad Faiz
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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ख़ुद
चले
आओ
या
बुला
भेजो
रात
अकेले
बसर
नहीं
होती
Aziz Lakhnavi
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ये
कब
कहा
था
मुझे
हमनवा
नहीं
देना
मगर
हाँ
फिर
से
वही
बे-वफ़ा
नहीं
देना
मैं
टूट
जाऊँ
तो
आकर
गले
लगा
लेना
कोई
दलील
कोई
मशवरा
नहीं
देना
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Saurabh Sharma 'sadaf'
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इस
से
पहले
कि
ज़मीं-ज़ाद
शरारत
कर
जाएँ
हम
सितारों
ने
ये
सोचा
है
कि
हिजरत
कर
जाएँ
दौलत-ए-ख़्वाब
हमारे
जो
किसी
काम
न
आई
अब
किसी
को
नहीं
मिलने
की
वसिय्यत
कर
जाएँ
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Idris Babar
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हिज्र
में
तुमने
केवल
बाल
बिगाड़े
हैं
हमने
जाने
कितने
साल
बिगाड़े
हैं
Anand Raj Singh
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मैं
तेरे
बाद
कोई
तेरे
जैसा
ढूँढता
हूँ
जो
बे-वफ़ाई
करे
और
बे-वफ़ा
न
लगे
Abbas Tabish
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सुब्ह
तक
हिज्र
में
क्या
जानिए
क्या
होता
है
शाम
ही
से
मिरे
क़ाबू
में
नहीं
दिल
मेरा
Jigar Moradabadi
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नसीहत
तो
क़िस्मत
को
देनी
है
अब
उसे
शक
है
मेहनत
पे
शायद
मेरी
Shivam Mishra
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ख़ास
कुछ
भी
नहीं
अब
मेरे
पास
है
चीख़ने
का
ख़मोशी
में
एहसास
है
Shivam Mishra
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मेरी
नजरों
ने
उनको
इस
क़दर
डाला
है
मुश्किल
में
नज़र
हम
सेे
चुराते
रह
गए
हैं
वो
ही
महफ़िल
में
Shivam Mishra
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तंग
आ
गया
मैं
इस
बनावटी
समाज
से
अब
मुझे
भी
सीखना
है
हर
फ़रेब
आज
से
उम्र
ये
तो
कट
रही
है
इंतिज़ार
में
ही
अब
ज़ख़्म
भी
मेरे
थके
हुए
हैं
हर
इलाज
से
याद
दिल
से
कब
किसी
की
कौन
है
मिटा
सका
कौन
है
जो
रौशनी
जुदा
करे
सिराज
से
कौन
है
यक़ीन
कर
रहा
किसी
पे
अब
यहाँ
है
जिसे
यक़ीन
वो
न
बच
सका
रिवाज
से
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Shivam Mishra
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सबको
हैरत
रही
उनके
दीदार
से
हमको
ज़ख़्मी
किया
अपने
किरदार
से
हाल
पूछो
तो
है
ख़ैरियत
सब
यहाँ
हैं
मगर
याद
में
उनके
बीमार
से
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Shivam Mishra
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