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Shivam Mishra
tang aa gaya main is banavti samaaj se
tang aa gaya main is banavti samaaj se | तंग आ गया मैं इस बनावटी समाज से
- Shivam Mishra
तंग
आ
गया
मैं
इस
बनावटी
समाज
से
अब
मुझे
भी
सीखना
है
हर
फ़रेब
आज
से
उम्र
ये
तो
कट
रही
है
इंतिज़ार
में
ही
अब
ज़ख़्म
भी
मेरे
थके
हुए
हैं
हर
इलाज
से
याद
दिल
से
कब
किसी
की
कौन
है
मिटा
सका
कौन
है
जो
रौशनी
जुदा
करे
सिराज
से
कौन
है
यक़ीन
कर
रहा
किसी
पे
अब
यहाँ
है
जिसे
यक़ीन
वो
न
बच
सका
रिवाज
से
- Shivam Mishra
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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शहसवारों
ने
रौशनी
माँगी
मैं
ने
बैसाखियाँ
जला
डालीं
Fahmi Badayuni
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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कहीं
कोई
चराग़
जलता
है
कुछ
न
कुछ
रौशनी
रहेगी
अभी
Abrar Ahmad
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इक
दिए
से
एक
कमरा
भी
बहुत
है
दिल
जलाने
से
ये
घर
रौशन
हुआ
है
Neeraj Neer
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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धूप
निकली
है
बारिशों
के
ब'अद
वो
अभी
रो
के
मुस्कुराए
हैं
Anjum Ludhianvi
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हर
इक
मकाँ
में
जला
फिर
दिया
दिवाली
का
हर
इक
तरफ़
को
उजाला
हुआ
दिवाली
का
Nazeer Akbarabadi
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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मिल
के
ग़ैरों
से
मुझको
जलाता
रहा
जिसको
अक्सर
मैं
अपना
बताता
रहा
Shivam Mishra
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जो
था
क़िस्मत
में
मेरी
वो
मिला
मुझको
न
शिकवा
है
किसी
से
नइँ
गिला
मुझको
Shivam Mishra
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शाम
बाँहों
में
उनकी
गुज़र
जाने
दे
वक़्त
अब
मुझको
थोड़ा
ठहर
जाने
दे
चल
चुका
हूँ
बहुत
मंज़िलों
के
लिए
भूल
राहों
के
अब
से
सफ़र
जाने
दे
रेत
साहिल
की
उड़ना
न
चाहे
है
अब
लहर
ख़ुद
को
किनारे
उतर
जाने
दे
है
तमन्ना
यही
फूल
बनकर
अभी
मुझको
राहों
में
उनकी
बिखर
जाने
दे
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Shivam Mishra
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बहुत
गहरा
हूँ
मैं
बोलो
कहाँ
तक
जाना
चाहोगे
है
बेहतर
ये
किनारा
कर
लो
वर्ना
डूब
जाओगे
Shivam Mishra
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तेरी
नज़रें
जिसे
देख
लें
इक
दफ़ा
फिर
लगे
नइँ
दु'आ
और
कोई
दवा
Shivam Mishra
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