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Shivam Mishra
shaam baanhon men unki guzar jaane de
shaam baanhon men unki guzar jaane de | शाम बाँहों में उनकी गुज़र जाने दे
- Shivam Mishra
शाम
बाँहों
में
उनकी
गुज़र
जाने
दे
वक़्त
अब
मुझको
थोड़ा
ठहर
जाने
दे
चल
चुका
हूँ
बहुत
मंज़िलों
के
लिए
भूल
राहों
के
अब
से
सफ़र
जाने
दे
रेत
साहिल
की
उड़ना
न
चाहे
है
अब
लहर
ख़ुद
को
किनारे
उतर
जाने
दे
है
तमन्ना
यही
फूल
बनकर
अभी
मुझको
राहों
में
उनकी
बिखर
जाने
दे
- Shivam Mishra
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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दामन
झटक
के
वादी-ए-ग़म
से
गुज़र
गया
उठ
उठ
के
देखती
रही
गर्द-ए-सफ़र
मुझे
Ali Sardar Jafri
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मैं
लौटने
के
इरादे
से
जा
रहा
हूँ
मगर
सफ़र
सफ़र
है
मिरा
इंतिज़ार
मत
करना
Sahil Sahri Nainitali
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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जिधर
जाते
हैं
सब
जाना
उधर
अच्छा
नहीं
लगता
मुझे
पामाल
रस्तों
का
सफ़र
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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मुसाफ़िरों
से
कहो
अपनी
प्यास
बाँध
रखें
सफ़र
की
रूह
में
सहरा
कोई
उतर
चुका
है
Aziz Nabeel
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जिस
दौर
से
माज़ी
मिरा
गुज़रा
है
ना
उस
दौर
से
अच्छा
है
ये
तन्हा
सफ़र
Bhoomi Srivastava
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यही
तो
एक
तमन्ना
है
इस
मुसाफ़िर
की
जो
तुम
नहीं
तो
सफ़र
में
तुम्हारा
प्यार
चले
Aalok Shrivastav
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जो
था
क़िस्मत
में
मेरी
वो
मिला
मुझको
न
शिकवा
है
किसी
से
नइँ
गिला
मुझको
Shivam Mishra
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वो
मेरा
आशियाँ
यूँँ
सजा
के
गया
जल
रही
हर
शमा
को
बुझा
के
गया
Shivam Mishra
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वो
जो
इल्ज़ाम
हम
पर
ही
लगा
के
फिर
ख़फ़ा
हैं
अब
हमें
कह
बद-चलन
ख़ुद
ही
हुए
वो
बे-वफ़ा
हैं
अब
Shivam Mishra
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ऐ
ज़माने
मुझे
यूँँ
न
बदनाम
कर
हो
सके
तो
मुझे
उनके
ही
नाम
कर
Shivam Mishra
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कौन
है
जग
में
मेरे
महाकाल
सा
है
मुसीबत
में
मेरी
वो
इक
ढाल
सा
है
ये
संसार
कैसा
बताऊँ
जो
मैं
बस
रहा
है
ये
माया
के
इक
जाल
सा
भक्ति
भोले
की
कर
के
ही
मिलता
है
सुख
है
ये
जीवन
भी
वर्ना
तो
पामाल
सा
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Shivam Mishra
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