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Sohil Barelvi
aisa maahol bhi kis kaam ka mere yaaro
aisa maahol bhi kis kaam ka mere yaaro | ऐसा माहौल भी किस काम का मेरे यारो
- Sohil Barelvi
ऐसा
माहौल
भी
किस
काम
का
मेरे
यारो
कोई
हँसना
भी
अगर
चाहे
तो
रोना
आए
- Sohil Barelvi
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ज़िक्र
तुम्हारा
बहुत
ज़रूरी
इन
ग़ज़लों
में
जानेमन
चाय
बिना
अदरक
को
डाले
अच्छी
थोड़ी
बनती
है
Tanoj Dadhich
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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अब
ये
भी
नहीं
ठीक
कि
हर
दर्द
मिटा
दें
कुछ
दर्द
कलेजे
से
लगाने
के
लिए
हैं
Jaan Nisar Akhtar
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आँख
में
पानी
रखो,
होंटों
पे
चिंगारी
रखो
ज़िंदा
रहना
है
तो
तरकीबें
बहुत
सारी
रखो
Rahat Indori
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किनारे
दो
मिलाने
में
हैं
कितनी
मुश्किलें
सोचो
ये
पुल
दिन
भर
ही
सीने
पे
बिचारा
चोट
खाता
है
Prashant Beybaar
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उदासी
का
सबब
दो
चार
ग़म
होते
तो
कह
देता
फ़ुलाँ
को
भूल
बैठा
हूँ
फ़ुलाँ
की
याद
आती
है
Ashu Mishra
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मुझ
को
बीमार
करेगी
तिरी
आदत
इक
दिन
और
फिर
तुझ
से
भी
अच्छा
नहीं
हो
पाऊँगा
Rahul Jha
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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शब
की
आग़ोश
में
महताब
उतारा
उस
ने
मेरी
आँखों
में
कोई
ख़्वाब
उतारा
उस
ने
Azm Shakri
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मैं
उसे
वो
मुझको
समझाता
रहा
पर
त'अल्लुक़
फिर
भी
मुरझाता
रहा
Madan Mohan Danish
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इक
दूसरे
से
दूर
रहेंगे
तमाम
उम्र
ये
जानते
हुए
भी
बहुत
पास
आ
गए
Sohil Barelvi
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वाक़िफ़
उस
से
रस्ता
होगा
रस्ते
भर
जो
भटका
होगा
पहले
नाव
भँवर
तक
जाए
फिर
मल्लाह
से
झगड़ा
होगा
सर
को
था
में
बैठा
है
जो
उस
के
सर
पे
बोझा
होगा
बीनाई
जो
खो
बैठा
है
उस
ने
सब
कुछ
देखा
होगा
छोटी
बातें
भूल
गए
गर
और
ख़सारा
ज़्यादा
होगा
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Sohil Barelvi
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इस
जहान-ए-ख़राब
में
सोहिल
और
क्या
क्या
मिले
नहीं
मालूम
Sohil Barelvi
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ज़ख़्म
हर
इक
भर
जाता
है
वक़्त
सहीह
जब
आता
है
सूरज
छुप
जाने
के
बाद
इक
जुगनू
शरमाता
है
करता
है
जन्नत
जन्नत
धरती
पर
मर
जाता
है
अब
तो
सिर्फ़
अँधेरा
ही
राह
हमें
दिखलाता
है
कोई
पूछे
मुझ
से
भी
मुझ
को
भी
कुछ
भाता
है
जब
से
टूटा
दरवाज़ा
हर
कोई
आता
जाता
है
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Sohil Barelvi
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किसी
दिन
आसमाँ
पर
जा
के
देखूँगा
ज़मीं
से
कुछ
नज़र
आता
नहीं
मुझ
को
Sohil Barelvi
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