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Shikha Pachouly
sab hadon se guzar gaii ho kya
sab hadon se guzar gaii ho kya | सब हदों से गुज़र गई हो क्या
- Shikha Pachouly
सब
हदों
से
गुज़र
गई
हो
क्या
आज
फिर
उसके
घर
गई
हो
क्या
दफ़्न
हो
कर
भी
दिल
धड़कता
है
तुम
मोहब्बत
में
मर
गई
हो
क्या
आ
गई
फिर
से
मेरी
बातों
में
मुझको
डर
था
सुधर
गई
हो
क्या
राह
इक
ख़ुद
तलक
भी
आती
है
सच
बताना
उधर
गई
हो
क्या
- Shikha Pachouly
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मक़ाम
'फ़ैज़'
कोई
राह
में
जचा
ही
नहीं
जो
कू-ए-यार
से
निकले
तो
सू-ए-दार
चले
Faiz Ahmad Faiz
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कोशिश
भी
कर
उमीद
भी
रख
रास्ता
भी
चुन
फिर
इस
के
ब'अद
थोड़ा
मुक़द्दर
तलाश
कर
Nida Fazli
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तुम्हारी
शक्ल
किसी
शक्ल
से
मिलाते
हुए
मैं
खो
गया
हूँ
नया
रास्ता
बनाते
हुए
Ashu Mishra
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इश्क़
में
धोखा
खाने
वाले
बिल्कुल
भी
मायूस
न
हो
इस
रस्ते
में
थोड़ा
आगे
मयख़ाना
भी
आता
है
Darpan
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बात
करने
का
हसीं
तौर-तरीक़ा
सीखा
हम
ने
उर्दू
के
बहाने
से
सलीक़ा
सीखा
Manish Shukla
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़
में
रोता
है
क्या
आगे
आगे
देखिए
होता
है
क्या
Meer Taqi Meer
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सफ़र
हालाँकि
तेरे
साथ
अच्छा
चल
रहा
है
बराबर
से
मगर
एक
और
रास्ता
चल
रहा
है
Shariq Kaifi
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सच
बोलने
के
तौर-तरीक़े
नहीं
रहे
पत्थर
बहुत
हैं
शहर
में
शीशे
नहीं
रहे
Nawaz Deobandi
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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यही
हमको
गुमाँ
अक्सर
रहे
हैं
हमारे
नाम
वो
जाँ
कर
रहे
हैं
अभी
है
दौर-ए-आग़ाज़-ए-मोहब्बत
वो
मेरा
दिल
दुखाते
डर
रहे
हैं
वफ़ा
उनकी
तबीयत
में
नहीं
है
वो
कोशिश
तो
यक़ीनन
कर
रहे
हैं
मेरी
रुस्वाई
हो
जाए
न
ज़िंदा
वो
मेरा
नाम
लेकर
मर
रहे
हैं
करेंगे
शा'इरी
भी
अगले
दम
पर
अभी
तो
हम
मोहब्बत
कर
रहे
हैं
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Shikha Pachouly
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तू
नाहक़
ही
इसे
झुठला
रहा
है
मोहब्बत
पर
कभी
पर्दा
रहा
है
अभी
रिश्ते
में
गुंजाइश
है
बाक़ी
अभी
वो
ग़लतियाँ
गिनवा
रहा
है
जहाँ
देखो
कोई
सूरज
का
टुकड़ा
किसी
बादल
से
धोखे
खा
रहा
था
जो
चाहे
तू
तो
रुक
कुछ
ख़्वाब
बुन
लें
तू
जल्दी
जा
अगर
तू
जा
रहा
है
उसे
अब
रोकना
मुमकिन
नहीं
है
वो
अपने
डर
से
आगे
जा
रहा
है
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Shikha Pachouly
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कुछ
सुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
गुन
गुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
धड़कने
भी
ज़रा
तो
रक़्स
करें
पास
आओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझपे
हक़
है
तुम्हारा
जाने
जाँ
हक़
जताओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझ
सेे
इस्लाह
लो
रक़ीबों
पर
जी
जलाओ
कि
जी
नहीं
लगता
ख़ुद
को
कितना
मैं
तोड़
सकती
हूँ
आज़माओ
कि
जी
नहीं
लगता
अब
न
तारों
से
रात
मानेगी
चाँद
लाओ
कि
जी
नहीं
लगता
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Shikha Pachouly
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सारे
आँसू
तुझ
पर
ज़ाया'
क्यूँँ
कर
दें
हमनें
तेरे
बाद
भी
दिलबर
करने
हैं
Shikha Pachouly
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दिल
किसी
नूर
से
मुनव्वर
था
जब
तलक
इश्क़
मेरे
अंदर
था
मौसम-ए-वस्ल
में
ये
मायूसी
यार
इस
सेे
तो
हिज्र
बेहतर
था
रात
कहता
है
दूधिया
नज़्में
चाँद
दिन
में
उदास
शायर
था
दीन
पूछो
तो
हँसने
लगता
था
गाँव
में
मेरे
इक
कलंदर
था
वो
जहाँ
हौसले
ने
दम
तोड़ा
बस
उसी
मोड़
पे
मुक़द्दर
था
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Shikha Pachouly
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