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karan singh rajput
mohabbat kuchh dinon ka saath hai bas
mohabbat kuchh dinon ka saath hai bas | मुहब्ब्त कुछ दिनों का साथ है बस
- karan singh rajput
मुहब्ब्त
कुछ
दिनों
का
साथ
है
बस
मुहब्ब्त
में
रखा
कुछ
भी
नहीं
है
- karan singh rajput
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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तुम
अगर
साथ
देने
का
वा'दा
करो
मैं
यूँँही
मस्त
नग़्में
लुटाता
रहूँ
तुम
मुझे
देख
कर
मुस्कुराती
रहो
मैं
तुम्हें
देख
कर
गीत
गाता
रहूँ
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Sahir Ludhianvi
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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भले
ही
फेंक
दी
थी
उसकी
सारी
चीज़ें
मैंने,
पर
कहीं
इक
चूड़ी
को
सँभालकर
रक्खा
हुआ
है
यार
karan singh rajput
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सोचा
उस
सेे
गिला
करूँँगा
मैं
यानी
अब
कुछ
नया
करूँँगा
मैं
घबरा
मत
तू
मैं
पास
हूँ
तेरे
आते
जाते
मिला
करूँँगा
मैं
जब
सतायेगा
डर
अँधेरे
का
तब
दिया
बन
जला
करूँँगा
मैं
साथ
जब
कोई
भी
नहीं
देगा
साथ
तब
भी
चला
करूँँगा
मैं
शा'इरी
की
तरह
हो
जाना
तुम
रोज़
तुमको
पढ़ा
करूँँगा
मैं
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karan singh rajput
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जो
किसी
सूरत
में
भाया
ना
था
हमको
आँख
तक
लगती
नहीं
उसके
बिना
अब
karan singh rajput
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ख़ुद-ब-ख़ुद
ही
खिल
उठा
चेहरा
मेरा
प्यार
से
बहनों
ने
बाँधी
राखी
जब
karan singh rajput
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मुझे
तुम
नया
ज़ख़्म
दे
दो
मेरी
जाँ
बड़े
दिन
से
कोई
ग़ज़ल
नईं
हुई
है
karan singh rajput
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