pahli baar vo khat likkha tha | पहली बार वो ख़त लिक्खा था

  - Shariq Kaifi
पहलीबारवोख़तलिक्खाथा
जिसकाजवाबभीसकताथा
ख़ुदअफ़्वाहउड़ाताथामैं
ख़ुदहीयक़ींभीकरलेताथा
उससेकहोउसरूपमेंआए
जैसापहलीनज़रमेंलगाथा
भूलचुकाथादेकेसदामैं
तबजंगलकाजवाबआयाथा
हमतोपराएथेइसघरमें
हमसेकौनख़फ़ाहोताथा
टूटगएइसकोशिशमेंहम
अपनीतरफ़झुकनाचाहाथा
उलझरहीथीआँखकहींपर
कोईमुझेपहचानरहाथा
टूटगयाफिरग़मकानशाभी
दुखकितनासुखदेसकताथा
जगहजगहसेटूटरहाहूँ
किसनेमुझेछूकरदेखाथा
कितनेसच्चेदिलसेहमने
अपनाअपनाझूटकहाथा
पहलीबारमैंउसकीख़ातिर
अपनेलिएकुछसोचरहाथा
इतनेसमझानेवालेथे
मैंकुछकैसेसमझसकताथा
बड़ीबड़ीआँखोंमेंउसकी
कोईसवालहुआकरताथा
  - Shariq Kaifi
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