yuñ bhi sehra se ham ko raghbat hai | यूँँ भी सहरा से हम को रग़बत है

  - Shariq Kaifi
यूँँभीसहरासेहमकोरग़बतहै
बसयहीबे-घरोंकीइज़्ज़तहै
अबसँवरनेकावक़्तउसकोनहीं
जबहमेंदेखनेकीफ़ुर्सतहै
तुझसेमेरीबराबरीहीक्या
तुझकोइंकारकीसुहूलतहै
क़हक़हामारिएमेंकुछभीनहीं
मुस्कुरानेमेंजितनीमेहनतहै
सैर-ए-दुनियाकोतोजाओमगर
वापसीमेंबड़ीमुसीबतहै
येजोइकशक्लमिलगईहैमुझे
येभीआईनेकीबदौलतहै
येतिरेशहरमेंखुलामुझपर
मुस्कुरानाभीएकआदतहै
  - Shariq Kaifi
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