dilon par naqsh hona chahta hooñ | दिलों पर नक़्श होना चाहता हूँ

  - Shariq Kaifi
दिलोंपरनक़्शहोनाचाहताहूँ
मुकम्मलमौतसेघबरारहाहूँ
सभीसेराज़कहदेताहूँअपने
जानेक्याछुपानाचाहताहूँ
तवज्जोहकेलिएतरसाहूँइतना
किइकइल्ज़ामपरख़ुशहोरहाहूँ
मुझेमहफ़िलकेबाहरकाजानो
मैंअपनाजामख़ालीकरचुकाहूँ
येआदतभीउसीकीदीहुईहै
किसबकोमुस्कुराकरदेखताहूँ
अलगहोतीहैहरलम्हेकीदुनिया
पुरानाहोकेभीकितनानयाहूँ
  - Shariq Kaifi
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