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shampa andaliib
aankhoñ ne jab khwaab sajaana chhod diya
aankhoñ ne jab khwaab sajaana chhod diya | आँखों ने जब ख़्वाब सजाना छोड़ दिया
- shampa andaliib
आँखों
ने
जब
ख़्वाब
सजाना
छोड़
दिया
धड़कन
ने
भी
शोर
मचाना
छोड़
दिया
- shampa andaliib
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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ग़म-ए-ज़माना
ने
मजबूर
कर
दिया
वर्ना
ये
आरज़ू
थी
कि
बस
तेरी
आरज़ू
करते
Akhtar Shirani
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तिरे
बग़ैर
अजब
बज़्म-ए-दिल
का
आलम
है
चराग़
सैंकड़ों
जलते
हैं
रौशनी
कम
है
Shakeel Badayuni
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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बीस
बरस
से
इक
तारे
पर
मन
की
जोत
जगाता
हूँ
दीवाली
की
रात
को
तू
भी
कोई
दिया
जलाया
कर
Majid Ul Baqri
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उसके
हाथ
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
तुमने
जिसका
हाथ
पकड़कर
छोड़
दिया
Vashu Pandey
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दु'आ
करो
कि
सलामत
रहे
मिरी
हिम्मत
ये
इक
चराग़
कई
आँधियों
पे
भारी
है
Waseem Barelvi
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ऐसी
तारीकियाँ
आँखों
में
बसी
हैं
कि
'फ़राज़'
रात
तो
रात
है
हम
दिन
को
जलाते
हैं
चराग़
Ahmad Faraz
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तुम्हारा
नाम
ले
कर
जी
रहे
हैं
अलग
कुछ
काम
ले
कर
जी
रहे
हैं
कभी
दिन
ठीक
से
गुज़रा
नहीं
है
दिलों
में
शाम
ले
कर
जी
रहे
हैं
अज़ल
से
रूह
की
पूरी
मदद
से
दिल-ए-नाकाम
ले
कर
जी
रहे
हैं
हटाओ
हाथ
सर
रक्खो
जिगर
पे
बहुत
इल्ज़ाम
ले
कर
जी
रहे
हैं
कभी
तो
देख
कर
लगता
है
ख़ुद
को
कोई
हम-नाम
ले
कर
जी
रहे
हैं
हमारे
दिल
से
क्या
फूटेगा
यारों
फ़क़त
कोहराम
ले
कर
जी
रहे
हैं
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shampa andaliib
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और
किसी
शख़्स
शै
में
न
अब
दिल
रहा
आप
को
देख
कर
बस
सुकूँ
मिल
रहा
आज
वक़्त-ए-ख़िज़ाँ
याँ
से
रुख़सत
हुआ
दिल
के
गुलशन
में
इक
गुल
नया
खिल
रहा
दिल
पे
अपना
कभी
बस
चला
ही
नहीं
कोई
मेरे
सिवा
याँ
पे
दाख़िल
रहा
नींद
में
खो
गए
आज
की
रात
हम
कोई
ख़्वाब-ओ-ख़्यालों
में
शामिल
रहा
मुस्कुराते
रहे
वक़्त
के
साथ
साथ
अपने
जीवन
का
बस
ये
ही
हासिल
रहा
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shampa andaliib
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लोग
उस
पर
भी
हक़
जताते
हैं
जिस
की
क़ीमत
चुकाई
है
मैंने
shampa andaliib
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किसी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
ख़ुशी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
सभी
को
जानना
है
इस
जहाँ
में
सभी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
ये
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
मगर
मैं
तुझी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
वही
इक
शख़्स
मेरी
सुन
सकेगा
उसी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
किसी
की
याद
में
आँसू
बहा
कर
नमी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
समझ
पाई
नहीं
मैं
राज़-ए-गुलशन
कली
से
बात
करना
चाहती
हूँ
किसी
की
राह
तकते
थक
गई
अब
घड़ी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
अगर
मेरी
सुने
तो
कुछ
घड़ी
मैं
नदी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
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shampa andaliib
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उसी
सूरज
की
मुझ
पर
रौशनी
है
जिसे
कल
साथ
में
देखा
था
हम
ने
shampa andaliib
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