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shampa andaliib
achaanak zalzala uthta hai gham ka
achaanak zalzala uthta hai gham ka | अचानक ज़लज़ला उठता है ग़म का
- shampa andaliib
अचानक
ज़लज़ला
उठता
है
ग़म
का
अचानक
चीख़
उठती
हूँ
मैं
ख़ुद
पर
- shampa andaliib
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उनके
दुखों
को
शे'र
में
कहना
तो
था
मगर
लड़के
समझ
न
पाएँ
कभी
लड़कियों
का
दुख
Ankit Maurya
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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दर्द
सहने
का
अलग
अंदाज़
है
जी
रहे
हैं
हम
अदा
की
ज़िंदगी
Farhat Abbas Shah
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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न
आया
ग़म
भी
मोहब्बत
में
साज़गार
मुझे
वो
ख़ुद
तड़प
गए
देखा
जो
बे-क़रार
मुझे
Asad Bhopali
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तू
अपने
सारे
दुख
जाकर
बताता
है
जिन्हें,
इक
दिन
बढ़ाएँगे
वही
ग़म-ख़्वार
तेरी
आँख
का
पानी
Siddharth Saaz
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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निगाह-ए-यार
के
जलवे
न
पूछो
बदन
पर
चाँद
तारे
जड़
गए
हैं
shampa andaliib
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जिस
घड़ी
यार
मुस्कुराता
है
मेरे
चेहरे
पे
नूर
आता
है
एक
दिन
वक़्त
ही
बताएगा
तेरा
मेरा
कोई
तो
नाता
है
पीठ
पर
घोंपते
हैं
सब
ख़ंजर
कौन
अब
दूर
से
सताता
है
ख़ूब-सूरत
हसीन
चेहरों
पर
वक़्त
भी
ख़ूब
मुस्कुराता
है
दोस्त
कोई
भी
बुत
नहीं
होता
काम
सब
का
निकल
ही
आता
है
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shampa andaliib
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नाकाम
कोशिशों
से
परेशाँ
थे
चारा-गर
तूने
जबीं
को
चूम
के
सब
ज़ख़्म
भर
दिए
shampa andaliib
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ख़त
ही
आया
न
कोई
उस
का
न
दिलबर
आया
देखते
देखते
फिर
माहे
दिसम्बर
आया
shampa andaliib
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लोग
तो
ख़ूब
हैं
इस
दुनिया
में
अच्छे
लेकिन
राज़दाँ
एक
हुआ
करता
है
दुनिया
भर
में
shampa andaliib
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