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shampa andaliib
jis ghadi yaar muskurata hai
jis ghadi yaar muskurata hai | जिस घड़ी यार मुस्कुराता है
- shampa andaliib
जिस
घड़ी
यार
मुस्कुराता
है
मेरे
चेहरे
पे
नूर
आता
है
एक
दिन
वक़्त
ही
बताएगा
तेरा
मेरा
कोई
तो
नाता
है
पीठ
पर
घोंपते
हैं
सब
ख़ंजर
कौन
अब
दूर
से
सताता
है
ख़ूब-सूरत
हसीन
चेहरों
पर
वक़्त
भी
ख़ूब
मुस्कुराता
है
दोस्त
कोई
भी
बुत
नहीं
होता
काम
सब
का
निकल
ही
आता
है
- shampa andaliib
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सभी
के
दीप
सुंदर
हैं
हमारे
क्या
तुम्हारे
क्या
उजाला
हर
तरफ़
है
इस
किनारे
उस
किनारे
क्या
Hafeez Banarasi
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किस
लिए
देखती
हो
आईना
तुम
तो
ख़ुद
से
भी
ख़ूब-सूरत
हो
Jaun Elia
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उस
सेे
ज़्यादा
हो
तुम
मेरे
मन
के
लिए
जितनी
प्यारी
है
राधा
किशन
के
लिए
Alankrat Srivastava
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मुझको
फिर
से
हसीन
लगने
लगी
उसने
इस
तरह
पेश
की
दुनिया
मुझको
अपनी
समझ
नहीं
आती
और
ऊपर
से
ये
तेरी
दुनिया
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Tajdeed Qaiser
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तुम्हारे
अंदर
छुपी
हुई
इक
हसीन
लड़की
ज़रा
से
काजल
ज़रा
सी
लाली
से
मिल
गई
है
Vishal Bagh
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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हसीन
लड़कियाँ
ख़ुश्बूएँ
चाँदनी
रातें
और
इनके
बाद
भी
ऐसी
सड़ी
हुई
दुनिया
Ameer Imam
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छू
लेने
दो
नाज़ुक
होंठों
को,
कुछ
और
नहीं
हैं
जाम
हैं
ये
क़ुदरत
ने
जो
हमको
बख़्शा
है,
वो
सब
सेे
हसीं
ईनाम
हैं
ये
Sahir Ludhianvi
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इतनी
जल्दी
न
गिरा
अपने
हसीं
रुख़
पे
नक़ाब
तू
मुझे
ठीक
से
हैरान
तो
हो
लेने
दे
Rajesh Reddy
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मिरी
ग़ज़ल
की
तरह
उस
की
भी
हुकूमत
है
तमाम
मुल्क
में
वो
सब
से
ख़ूब-सूरत
है
बहुत
दिनों
से
मिरे
साथ
थी
मगर
कल
शाम
मुझे
पता
चला
वो
कितनी
ख़ूब-सूरत
है
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Bashir Badr
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बुरी
बातों
को
दिल
पर
मत
लगाओ
जहाँ
तक
हो
सके
बस
मुस्कुराओ
उसी
पर
ग़ौर
करना
जो
है
बस
में
नहीं
पा
सकते
जो
शय
भूल
जाओ
मिरे
अंदर
से
इक
आवाज़
आए
कभी
अपनी
तरफ़
भी
लौट
आओ
मैं
अपने
हाथों
से
घर
को
सजा
दूँ
तुम
अपने
हाथ
से
दीपक
जलाओ
अभी
दिल
को
तसल्ली
मिल
न
पाई
ज़रा
सा
मुस्कुराकर
फिर
दिखाओ
बढ़ाओ
बाम-ओ-दर
की
ऐसे
रौनक़
दर-ओ-दीवार
को
जन्नत
बनाओ
जो
पंछी
जा
चुके
हैं
दूर
हैं
वो
जो
पंछी
जा
रहे
उन
को
बुलाओ
तुम्हें
सब
कुछ
अता
रब
ने
किया
है
बनाना
चाहते
जो
कुछ
बनाओ
बदन
का
ख़ून
तक
हो
जाए
शामिल
ग़ज़ल
के
हुस्न
को
इतना
बढ़ाओ
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shampa andaliib
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इक
ज़माना
गुज़र
गया
ख़ुद
को
मुस्कुराते
हुए
नहीं
देखा
shampa andaliib
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बहुत
से
ख़ास
रिश्तों
में
दरारें
पड़
चुकी
हैं
अब
हमारी
सादगी
दुश्मन
हमारी
बन
गई
यारों
shampa andaliib
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तीरगी
में
कुछ
नहीं
बस
तीरगी
है
घर
के
बाहर
देख
कितनी
रौशनी
है
एक
जैसे
सुख
हैं
सब
के
और
दुख
भी
जो
तुम्हारी
वो
हमारी
ज़िंदगी
है
एक
वो
है
एक
वो
है
एक
वो
उफ़
और
किस
किस
से
तुम्हारी
दोस्ती
है
ये
अगर
मैं
भी
नहीं
तो
कौन
है
फिर
आइने
में
कौन
मुझ
पर
हँस
रही
है
सीधी
सादी
बात
है
गर
कोई
समझे
दोस्त
दुश्मन
आदमी
का
आदमी
है
पहले
जैसा
कुछ
नहीं
इस
दौर
में
अब
हर
किसी
को
हर
कोई
अब
अजनबी
है
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shampa andaliib
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दुनिया
ये
हम
को
एक
तरीक़े
से
देखती
वैसे
मैं
हर
तरह
से
हूँ
लोगों
से
मुख़्तलिफ़
shampa andaliib
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