hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
shampa andaliib
ik zamaana guzar gaya khud ko
ik zamaana guzar gaya khud ko | इक ज़माना गुज़र गया ख़ुद को
- shampa andaliib
इक
ज़माना
गुज़र
गया
ख़ुद
को
मुस्कुराते
हुए
नहीं
देखा
- shampa andaliib
Download Sher Image
जहाँ
भर
का
अँधेरा
आज
देखो
मिरे
दिल
में
समाता
जा
रहा
है
shampa andaliib
Send
Download Image
0 Likes
नाकाम
कोशिशों
से
परेशाँ
थे
चारा-गर
तूने
जबीं
को
चूम
के
सब
ज़ख़्म
भर
दिए
shampa andaliib
Send
Download Image
1 Like
किसी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
ख़ुशी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
सभी
को
जानना
है
इस
जहाँ
में
सभी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
ये
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
मगर
मैं
तुझी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
वही
इक
शख़्स
मेरी
सुन
सकेगा
उसी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
किसी
की
याद
में
आँसू
बहा
कर
नमी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
समझ
पाई
नहीं
मैं
राज़-ए-गुलशन
कली
से
बात
करना
चाहती
हूँ
किसी
की
राह
तकते
थक
गई
अब
घड़ी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
अगर
मेरी
सुने
तो
कुछ
घड़ी
मैं
नदी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
Read Full
shampa andaliib
Download Image
1 Like
इतने
बेरंग
भी
नहीं
हैं
हम
गर
ये
दौर-ए-ख़िज़ाँ
गुज़र
जाए
shampa andaliib
Send
Download Image
0 Likes
तीरगी
में
कुछ
नहीं
बस
तीरगी
है
घर
के
बाहर
देख
कितनी
रौशनी
है
एक
जैसे
सुख
हैं
सब
के
और
दुख
भी
जो
तुम्हारी
वो
हमारी
ज़िंदगी
है
एक
वो
है
एक
वो
है
एक
वो
उफ़
और
किस
किस
से
तुम्हारी
दोस्ती
है
ये
अगर
मैं
भी
नहीं
तो
कौन
है
फिर
आइने
में
कौन
मुझ
पर
हँस
रही
है
सीधी
सादी
बात
है
गर
कोई
समझे
दोस्त
दुश्मन
आदमी
का
आदमी
है
पहले
जैसा
कुछ
नहीं
इस
दौर
में
अब
हर
किसी
को
हर
कोई
अब
अजनबी
है
Read Full
shampa andaliib
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Terrorism Shayari
Bimar Shayari
Akhbaar Shayari
Shehar Shayari
Chaaragar Shayari