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shampa andaliib
duniya ye ham ko ek tareeqe se dekhti
duniya ye ham ko ek tareeqe se dekhti | दुनिया ये हम को एक तरीक़े से देखती
- shampa andaliib
दुनिया
ये
हम
को
एक
तरीक़े
से
देखती
वैसे
मैं
हर
तरह
से
हूँ
लोगों
से
मुख़्तलिफ़
- shampa andaliib
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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ये
कब
कहती
हूँ
तुम
मेरे
गले
का
हार
हो
जाओ
वहीं
से
लौट
जाना
तुम
जहाँ
बेज़ार
हो
जाओ
Parveen Shakir
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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अपनी
कश्ती
पे
कम
भरोसा
था
अब
समुंदर
से
क्या
करूँँ
शिकवा
shampa andaliib
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हम
को
दोषी
ठहराते
हैं
ख़ुद
ही
लोग
बदल
जाते
हैं
अपनों
की
बातें
सुन
कर
हम
अब
मन
ही
मन
घबराते
हैं
उन
को
कोई
दुख
नइँ
होता
जो
अपना
रोना
गाते
हैं
रोज़
दु'आ
में
रब
से
बोलूँ
जाने
वाले
कब
आते
हैं
छोड़
के
दुनिया-दारी
मुझ
को
अब
चंदा
तारे
भाते
हैं
पागल
क़ासिद
लौटा
कर
अब
मेरी
चिट्ठी
ले
आते
हैं
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shampa andaliib
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जो
शख़्स
मेहरबान
निगहबान
था
कभी
बे-साख़्ता
वो
दूर
बहुत
दूर
हो
गया
shampa andaliib
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किसी
से
अब
कोई
शिकवा
नहीं
है
हमारा
वक़्त
ही
अच्छा
नहीं
है
फ़लक
पर
धुंध
ही
है
या
हमीं
ने
अभी
तक
ग़ौर
से
देखा
नहीं
है
हमारी
ज़िंदगी
रफ़्तार
में
है
हमारे
पास
कुछ
रुकता
नहीं
है
ये
सूनी
खिड़कियाँ
अब
बोलती
हैं
कोई
परदेस
से
लौटा
नहीं
है
कई
सदमों
से
वाक़िफ़
हो
चुका
है
ग़नीमत
है
कि
दिल
बैठा
नहीं
है
ख़ुशी
की
बात
है
ख़ुश
हैं
हमारे
ख़ुशी
की
बात
पर
रोना
नहीं
है
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shampa andaliib
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लोग
तो
ख़ूब
हैं
इस
दुनिया
में
अच्छे
लेकिन
राज़दाँ
एक
हुआ
करता
है
दुनिया
भर
में
shampa andaliib
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