masroof apne aap men rehta hai har ghadi | मसरूफ़ अपने आप में रहता है हर घड़ी

  - shampa andaliib
मसरूफ़अपनेआपमेंरहताहैहरघड़ी
दिलयेहमाराऔरकीसुनतानहींकभी
पहरोंयहीमैंबैठकेबसदेखतीरही
क्याकुछबयानकरतीहैइकट्रेनदौड़ती
ख़्वाहिशथीआसमाँसेज़मींदेखतीमगर
इकलड़कीएकघरकीरसोईमेंरहगई
अफ़सोसवोदरख़्तभीइकदमसेगिरगया
महफ़ूज़जिसकेसाएमेंमैंहरघड़ीरही
दुनियासमझरहीहैइसीकोअस्लमें
पिंजरेमेंउम्रकटरहीहै‘अंदलीब’की
  - shampa andaliib
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