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Shadan Ahsan Marehrvi
she'r achha koi hua hi nahin
she'r achha koi hua hi nahin | शे'र अच्छा कोई हुआ ही नहीं
- Shadan Ahsan Marehrvi
शे'र
अच्छा
कोई
हुआ
ही
नहीं
ख़ास
कहने
को
कुछ
रहा
ही
नहीं
रूठ
कर
चेहरे
को
जो
फेर
लिया
एक
मिसरा
भी
फिर
हुआ
ही
नहीं
इस
तरह
से
जुदा
हुआ
मुझ
सेे
जैसे
मेरा
कभी
वो
था
ही
नहीं
ढ़ाई
अक्षर
की
बात
मैंने
लिखी
लफ्ज़
उसने
कोई
पढ़ा
ही
नहीं
तुम
बताते
रहे
बुतों
को
ख़ुदा
बुत
ये
कहते
रहे
ख़ुदा
ही
नहीं
राब्ता
जिस
सेे
तुमको
करना
था
शख़्स
वो
मुझ
में
अब
रहा
ही
नहीं
हैं
सुख़नवर
जहाँ
में
और
मगर
मीर
जैसा
कोई
हुआ
ही
नहीं
- Shadan Ahsan Marehrvi
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अपना
रिश्ता
ज़मीं
से
ही
रक्खो
कुछ
नहीं
आसमान
में
रक्खा
Jaun Elia
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त'अल्लुक़
जो
भी
रक्खो
सोच
लेना
कि
हम
रिश्ता
निभाना
जानते
हैं
Ambreen Haseeb Ambar
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तू
समझता
है
कि
रिश्तों
कि
दुहाई
देंगे
अरे
हम
तो
वो
हैं
तेरे
चेहरे
से
दिखाई
देंगे
Waseem Barelvi
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हमारे
घर
के
रिश्तों
में
अभी
बारीकियाँ
कम
हैं
भतीजा
मार
खाता
है
तो
चाचा
बोल
देते
हैं
Nirbhay Nishchhal
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सभी
रिश्तें
मैं
यूँँ
बचाए
हूँ
जैसे
तड़पते
दियों
को
हवा
देते
रहना
Parul Singh "Noor"
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मैं
शाइर
उसको
चूड़ी
ही
दे
सकता
था
बस
रिश्ता
सोने
के
कंगन
देने
पर
होता
है
Neeraj Neer
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कुछ
ख़ास
तो
बदला
नहीं
जाने
से
तुम्हारे
बस
राब्ता
कम
हो
गया
फूलों
की
दुकाँ
से
Ashu Mishra
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कैसे
कहें
कि
तुझ
को
भी
हम
से
है
वास्ता
कोई
तू
ने
तो
हम
से
आज
तक
कोई
गिला
नहीं
किया
Jaun Elia
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कौन
सी
दीवार
है
मौजूद
इस
रिश्ते
में
'साज़'
क्यूँँ
नहीं
रो
सकते
हम
अपने
पिता
के
सामने
Siddharth Saaz
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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अब
तो
घर
मुझको
घर
नहीं
लगता
दिल
मेरा
इक
पहर
नहीं
लगता
ज़िन्दगी
अब
सज़ा
सी
लगती
है
मौत
से
भी
तो
डर
नहीं
लगता
छोड़
कर
जबसे
तुम
गए
मुर्शिद
अच्छा
अब
रहगुज़र
नहीं
लगता
कैसे
मुमकिन
हो
लौट
आओ
तुम
रेत
में
तो
शजर
नहीं
लगता
वो
जो
इक
पेड़
था
हरा
उस
में
कोई
भी
अब
समर
नहीं
लगता
क़ैदख़ाना
है
घर
तुम्हारे
बिन
घर
ज़रा
सा
भी
घर
नहीं
लगता
मुन्तक़िल
जब
से
हो
गए
हो
तुम
दिल
हमारा
इधर
नहीं
लगता
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Shadan Ahsan Marehrvi
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बदगुमाँ
जो
हों
उन
सेे
कह
देना
तुमको
रानी
बना
के
रक्खूँगा
Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िन्दा
होते
हैं
रोज़
मरते
हैं
लोग
पागल
हैं
इश्क़
करते
हैं
हमको
कहनी
है
उन
सेे
बात
वही
बात
कहते
सभी
जो
डरते
हैं
और
डरते
नहीं
किसी
शय
से
उनकी
नाराज़गी
से
डरते
हैं
गुफ़्तगू
उन
सेे
कैसे
की
जाए
बात
करते
हैं
फूल
झड़ते
हैं
डर
ख़ुदास
ज़रा
नहीं
लगता
हिज्र
की
वहशतों
से
डरते
हैं
रोज़
करते
हैं
वस्ल
के
वादे
रोज़
वादे
से
वो
मुकरते
हैं
साफ़
कहते
हैं
बात
हम
फिर
भी
आँखों
में
आपकी
अखरते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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लेट
उठते
हैं
लेट
सोते
हैं
कुछ
अदीबों
में
ऐब
होते
हैं
जिनको
मौला
अता
सुख़न
करदे
उन
फ़क़ीरों
के
ऐश
होते
हैं
सौ-सौ
शहनाइयाँ
बजें
फिर
भी
सिसकियाँ
भर
के
लोग
रोते
हैं
दूर
जाते
हैं
जब
भी
वो
मुझ
सेे
और
मेरे
क़रीब
होते
हैं
आए
बरसात
तो
मिले
राहत
ऐसे
बादल
तो
रोज़
होते
हैं
कौन
ज़ंजीर
पाँव
की
तोड़े
चैन
से
हम
क़फ़स
में
सोते
हैं
याद
करते
हैं
गांव
की
गालियाँ
और
ज़ार-ओ-क़तार
रोते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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ज़िंदगानी
जब
कहानी
हो
गई
वो
कहानी
ख़ुद
पुरानी
हो
गई
ज़िन्दगी
ने
जो
मुसर्रत
पाई
थी
वो
ख़ुशी
आँखों
का
पानी
हो
गई
जान
दी
दिल
दे
दिया
सौदा
किया
बात
उल्फ़त
की
ज़बानी
हो
गई
बात
उसने
रास्ते
में
जब
न
की
में
ये
समझा
वो
सियानी
हो
गई
दाग़
दामन
पर
हमारे
जो
लगे
क्या
ये
उल्फत
की
निशानी
हो
गई
उनके
आने
से
हुआ
मसरूर
मैं
ज़िन्दगी
की
मेहरबानी
हो
गई
इश्क़
ने
फेरा
तसव्वुर
जब
मेरा
तब
ज़मीं
भी
आसमानी
हो
गई
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Shadan Ahsan Marehrvi
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