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Shadan Ahsan Marehrvi
aadmi aadmi ka dushman hai
aadmi aadmi ka dushman hai | आदमी आदमी का दुश्मन है
- Shadan Ahsan Marehrvi
आदमी
आदमी
का
दुश्मन
है
बेसबब
यकदिली
का
दुश्मन
है
तुम
नहीं
हो
जो
मेरे
साथ
तो
अब
हर
पहर
ज़िन्दगी
का
दुश्मन
है
मिन्नतें
काम
नहीं
आती
अब
दौर
ये
आजज़ी
का
दुश्मन
है
मय
की
मस्ती
से
है
ग़ाफ़िल
अब
तक
मुत्तक़ी
मैकशी
का
दुश्मन
है
और
दुश्मन
वो
किसी
शय
का
नहीं
बस
तेरी
पैरवी
का
दुश्मन
है
गुल
से
उड़ती
हुई
तितली
ने
कहा
ये
चमन
नाज़ुकी
का
दुश्मन
है
काम
करता
ही
नहीं
जाम
के
अब
होश
ये
बेख़ुदी
का
दुश्मन
है
- Shadan Ahsan Marehrvi
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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल
न
पूछिए
'मजरूह'
शराब
एक
है
बदले
हुए
हैं
पैमाने
Majrooh Sultanpuri
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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शायद
शराब
पीके
तुम्हें
फ़ोन
मैं
करूँँ
बस
इसलिए
शराब
कभी
पी
नहीं
मैंने
Tanoj Dadhich
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मेरी
जवानी
को
कमज़ोर
क्यूँ
समझते
हो
तुम्हारे
वास्ते
अब
भी
शबाब
बाक़ी
है
ये
और
बात
है
बोतल
ये
गिर
के
टूट
गई
मगर
अभी
भी
ज़रा
सी
शराब
बाक़ी
है
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Paplu Lucknawi
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ये
मय-कदा
है
यहाँ
हैं
गुनाह
जाम-ब-दस्त
वो
मदरसा
है
वो
मस्जिद
वहाँ
मिलेगा
सवाब
Ali Sardar Jafri
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सब
को
मारा
'जिगर'
के
शे'रों
ने
और
'जिगर'
को
शराब
ने
मारा
Jigar Moradabadi
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वो
गुल-फ़रोश
कहाँ
अब
गुलाब
किस
से
लूँ
नहीं
रहा
मिरा
साक़ी
शराब
किस
से
लूँ
Anwar Shaoor
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ऐ
शैख़
तू
शराब
के
पीछे
न
पड़
कभी
ये
ख़ुद
को
वाहियात
बनाने
की
चीज़
है
Shivsagar Sahar
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मुझे
शराब
पिलाई
गई
है
आँखों
से
मेरा
नशा
तो
हज़ारों
बरस
में
उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
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छू
लेने
दो
नाज़ुक
होंठों
को,
कुछ
और
नहीं
हैं
जाम
हैं
ये
क़ुदरत
ने
जो
हमको
बख़्शा
है,
वो
सब
सेे
हसीं
ईनाम
हैं
ये
Sahir Ludhianvi
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ज़िंदगानी
जब
कहानी
हो
गई
वो
कहानी
ख़ुद
पुरानी
हो
गई
ज़िन्दगी
ने
जो
मुसर्रत
पाई
थी
वो
ख़ुशी
आँखों
का
पानी
हो
गई
जान
दी
दिल
दे
दिया
सौदा
किया
बात
उल्फ़त
की
ज़बानी
हो
गई
बात
उसने
रास्ते
में
जब
न
की
में
ये
समझा
वो
सियानी
हो
गई
दाग़
दामन
पर
हमारे
जो
लगे
क्या
ये
उल्फत
की
निशानी
हो
गई
उनके
आने
से
हुआ
मसरूर
मैं
ज़िन्दगी
की
मेहरबानी
हो
गई
इश्क़
ने
फेरा
तसव्वुर
जब
मेरा
तब
ज़मीं
भी
आसमानी
हो
गई
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Shadan Ahsan Marehrvi
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अँधेरे
और
काले
हो
गए
हैं
मेरे
दुश्मन
उजाले
हो
गए
हैं
चमन
को
छोड़कर
जब
से
गए
हो
हरे
पत्ते
भी
काले
हो
गए
हैं
तेरी
चाहत
में
पढ़कर
सब
बिरागी
मोहब्बत
करने
वाले
हो
गए
हैं
बहुत
लागत
ग़ज़ल
में
लग
रही
है
के
अब
रोटी
के
लाले
हो
गए
हैं
ज़रा
सा
जो
हुआ
बेख़ुद
तो
मेरे
मुख़ालिफ़
होश
वाले
हो
गए
हैं
करम
की
जिस
सेे
की
हमने
गुज़ारिश
वो
बादल
और
काले
हो
गए
हैं
तेरी
ही
हिज्र
की
वीरानियों
से
मेरे
कमरे
में
जाले
हो
गए
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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दर-हक़ीक़त
मेरी
हालत
देखिए
उनकी
आँखों
की
मुरव्वत
देखिए
मुस्कुराकर
ज़ख़्म
दिल
को
दे
गया
फ़ित्नागर
की
आप
फ़ितरत
देखिए
हिज्र
के
लम्हों
में
उनको
सोचिये
चार
सू
फिर
उनकी
सूरत
देखिए
दिल-लगी
दिल
की
लगी
बन
जाएगी
ज़िद
न
कीजे
आप
हज़रत
देखिए
देखना
चिलमन
से
मुझको
यार
का
कह
रही
है
सब
हक़ीक़त
देखिए
देखना
हो
हुस्न
का
जलवा
अगर
देखने
वालों
की
हैरत
देखिए
मुस्कुराने
पर
मेरे
मत
जाइए
दिल
के
वीराने
की
वहशत
देखिए
तुझ
से
जो
बिछड़ा
तो
'आशिक़
मर
गया
आप
दीवाने
की
निस्बत
देखिए
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Shadan Ahsan Marehrvi
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अब
तो
घर
मुझको
घर
नहीं
लगता
दिल
मेरा
इक
पहर
नहीं
लगता
ज़िन्दगी
अब
सज़ा
सी
लगती
है
मौत
से
भी
तो
डर
नहीं
लगता
छोड़
कर
जबसे
तुम
गए
मुर्शिद
अच्छा
अब
रहगुज़र
नहीं
लगता
कैसे
मुमकिन
हो
लौट
आओ
तुम
रेत
में
तो
शजर
नहीं
लगता
वो
जो
इक
पेड़
था
हरा
उस
में
कोई
भी
अब
समर
नहीं
लगता
क़ैदख़ाना
है
घर
तुम्हारे
बिन
घर
ज़रा
सा
भी
घर
नहीं
लगता
मुन्तक़िल
जब
से
हो
गए
हो
तुम
दिल
हमारा
इधर
नहीं
लगता
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Shadan Ahsan Marehrvi
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लेट
उठते
हैं
लेट
सोते
हैं
कुछ
अदीबों
में
ऐब
होते
हैं
जिनको
मौला
अता
सुख़न
करदे
उन
फ़क़ीरों
के
ऐश
होते
हैं
सौ-सौ
शहनाइयाँ
बजें
फिर
भी
सिसकियाँ
भर
के
लोग
रोते
हैं
दूर
जाते
हैं
जब
भी
वो
मुझ
सेे
और
मेरे
क़रीब
होते
हैं
आए
बरसात
तो
मिले
राहत
ऐसे
बादल
तो
रोज़
होते
हैं
कौन
ज़ंजीर
पाँव
की
तोड़े
चैन
से
हम
क़फ़स
में
सोते
हैं
याद
करते
हैं
गांव
की
गालियाँ
और
ज़ार-ओ-क़तार
रोते
हैं
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