sach yahii hai ki bahut aaj ghin aati hai mujhe | सच यही है कि बहुत आज घिन आती है मुझे

  - Sabir
सचयहीहैकिबहुतआजघिनआतीहैमुझे
वैसेवोशयकभीमतलूबरहीभीहैमुझे
अपनीतन्हाईकोबाज़ारघुमालायाहूँ
घरकीचौखटपेपहुँचतेहीलिपटतीहैमुझे
तुझसेमिलताहूँतोजातीहैआँखोंमेंनमी
तूसमझताहैशिकायतयेपुरानीहैमुझे
उसकेशरसेमैंसदामाँगतारहताहूँपनाह
इसीदुनियासेमोहब्बतभीबलाकीहैमुझे
बसइसीवजहसेहैउसकीज़बाँमेंलुक्नत
उसकोवोबातसुनानीहैजोकहनीहैमुझे
  - Sabir
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