mukhtasar hi sahi muyassar hai | मुख़्तसर ही सही मुयस्सर है

  - Sabir
मुख़्तसरहीसहीमुयस्सरहै
जोभीकुछहैनहींसेबेहतरहै
दिन-दहाड़ेगुनाहकरताहूँ
मो'तबरहोजाऊँयेडरहै
मंचपरकामयाबहोकिहो
मुझकोकिरदारअपनाअज़्बरहै
सबकोपथरादियापलकझपके
हमकहतेथेशोबदा-गरहै
ऐनमुमकिनहैवोपलटआए
मेराईमानमोजज़ोंपरहै
पहलेमौसमपेतब्सिराकरना
फिरवोकहनाजोदिलकेअंदरहै
सारेमंज़रहसीनलगतेहैं
दूरियाँकमहोंतोबेहतरहै
रास्तेबैनकररहेहैंक्यूँँ
क्यामसाफ़तयेइंतिहापरहै
फ़स्लबोईभीहमनेकाटीभी
अबकहनाज़मीनबंजरहै
  - Sabir
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