akheer-e-shab sard raakh choolhe ki jhaad laayein | अख़ीर-ए-शब सर्द राख चूल्हे की झाड़ लाएँ

  - Sabir
अख़ीर-ए-शबसर्दराखचूल्हेकीझाड़लाएँ
तुम्हारीयादोंकेआइनेफिरसेजगमगाएँ
गलीकेनुक्कड़परअबनहींहैवोशोरफैला
भलाईइसमेंहैज़ाइक़ेहमभीभूलजाएँ
रखेरखेहोगएपुरानेतमामरिश्ते
कहाँकिसीअजनबीसेरिश्तानयाबनाएँ
वोहँसीआँखेंजलाएदेतीहैंजाँहमारी
नवाह-ए-जाँमेंग़ुबार-ए-आह-ओ-बुकाउड़ाएँ
हमारीसबलग़्ज़िशेंहैंमहफ़ूज़डाइरीमें
तभीतोहैंमुद्दईकिकमकममिलीसज़ाएँ
  - Sabir
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