mustaqar ki KHvaahish men muntashir se rahte hain | मुस्तक़र की ख़्वाहिश में मुंतशिर से रहते हैं

  - Sabir
मुस्तक़रकीख़्वाहिशमेंमुंतशिरसेरहतेहैं
बे-कनारदरियामेंलफ़्ज़लफ़्ज़बहतेहैं
सबउलट-पलटदीहैंसर्फ़-ओ-नहव-ए-देरीना
ज़ख़्मज़ख़्मजीतेहैंलम्हालम्हासहतेहैं
यारलोगकहतेहैंख़्वाबकामज़ारउसको
अज़-रह-ए-रिवायतहमख़्वाब-गाहकहतेहैं
रौशनीकीकिरनेंहैंयालहूअंधेरेका
सुर्ख़-रंगक़तरेजोरौज़नोंसेबहतेहैं
येक्याबद-मज़ाक़ीहैगर्दझाड़तेक्यूँँहो
इसमकान-ए-ख़स्तामेंयारहमभीरहतेहैं
  - Sabir
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