vaa'da tha kab ka baar-e-khuda sochne to de | वा'दा था कब का बार-ए-ख़ुदा सोचने तो दे

  - Sabir
वा'दाथाकबकाबार-ए-ख़ुदासोचनेतोदे
माक़ूलकोईउज़्रनयासोचनेतोदे
पर्चीवोजिसपेलिक्खाहुआहैपतातिरा
रखकरकहाँमैंभूलगयासोचनेतोदे
वोहिज्रभीतोगूँगीपहेलीसेकमथा
अबवस्लपड़ाहैज़रासोचनेतोदे
चाल-बाज़ऐसेइतराकेमुस्कुरा
चलनेदेचालमुझकोज़रासोचनेतोदे
होंइख़्तियारसेभीपरेकुछतसर्रुफ़ात
अंदेशा-ए-हिसाबहटासोचनेतोदे
जोहोगयामैंउसपेहूँराज़ीख़ुदाक़सम
येक्यूँँहुआयेकैसेहुआसोचनेतोदे
  - Sabir
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