दुनियासेआजजज़्ब-ए-वफ़ामाँगताहूँमैं
येजुर्महैअगरतोसज़ामाँगताहूँमैं
किसमोड़परहयातकेछोड़ाहैतुमनेसाथ
इकइकसेआजअपनापतामाँगताहूँमैं
मैंनेतोकीथीदर्द-ए-मुसलसलकीआरज़ू
तुमकोगुमाँहुआकिदवामाँगताहूँमैं
रानाई-ए-बहारबढ़ानेकेवास्ते
तेराजमालतेरीअदामाँगताहूँमैं
बरसाओमुझपेसंगब-नाम-ए-ख़ुलूस-ए-इश्क़
अपनेकिएकीआपसज़ामाँगताहूँमैं
तुममाँगतेहोसारीख़ुदाईतोमाँगलो
अपनेलिएतोसिर्फ़ख़ुदामाँगताहूँमैं
क्याजानेअबसमेटकेसारीतबाहियाँ
इसदौर-ए-इज़्तिराबसेक्यामाँगताहूँमैं
क़ातिलकोग़म-गुसारसमझताहूँअब'रईस'
मक़्तलमेंज़िंदगीकीदु'आमाँगताहूँमैं