nishaat-e-manjil-e-qalb-o-nazar ko yaad karo | निशात-ए-मंज़िल-ए-क़ल्ब-ओ-नज़र को याद करो

  - Raees Akhtar
निशात-ए-मंज़िल-ए-क़ल्ब-ओ-नज़रकोयादकरो
सफ़रमेंअपनेकिसीहम-सफ़रकोयादकरो
बड़ेख़ुलूससेतारीकरास्तोंपेचलो
बड़ेतपाकसेहुस्न-ए-सहरकोयादकरो
जलेचराग़तोचुपकेसेनामलोमेरा
मिलेख़ुशीतोमिरीचश्म-ए-तरकोयादकरो
जोदिलमेंरहकेभीअंजानसीरहीबरसों
किसीकीउसनिगह-ए-फ़ित्ना-गरकोयादकरो
दिल-ए-हज़ींकातक़ाज़ाहैजादा-ए-ग़ममें
नज़रकेसाथफ़रेब-ए-नज़रकोयादकरो
क़दमक़दमपेजहाँज़िंदगीनिखरतीथी
किसीकेप्यारकीउसरहगुज़रकोयादकरो
हैजिसकेफ़ैज़सेअबतकभीरौशनीघरमें
'रईस'अबभीउसीचश्म-ए-तरकोयादकरो
  - Raees Akhtar
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