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Zubair Ali Tabish
aaj to dil ke dard par hañs kar
aaj to dil ke dard par hañs kar | आज तो दिल के दर्द पर हँस कर
- Zubair Ali Tabish
आज
तो
दिल
के
दर्द
पर
हँस
कर
दर्द
का
दिल
दुखा
दिया
मैं
ने
- Zubair Ali Tabish
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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हमने
जिस
मासूम
परी
को
अपने
दिल
की
जाँ
बोला
था
उसने
हमको
धोखा
देकर
और
किसी
को
हाँ
बोला
था
सारे
वादे
भूल
गई
तुम
कोई
बात
नहीं
जानेमन
लेकिन
ये
कैसे
भूली
तुम
मेरी
माँ
को
माँ
बोला
था
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Tanoj Dadhich
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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शक
है
तुझे
अगर
ये
अब
भी
गुदाज़
है
दिल
तो
सीने
से
कभी
ये
पत्थर
निकाल
मेरा
Abhay Aadiv
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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मसअला
फिर
वही
बे-घर
हुए
लोगों
का
है
हम
सभी
दिल
से
निकाले
कहाँ
तक
जाएँगे
Neeraj Neer
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तुम्हारे
ग़म
से
तौबा
कर
रहा
हूँ
तअ'ज्जुब
है
मैं
ऐसा
कर
रहा
हूँ
है
अपने
हाथ
में
अपना
गिरेबाँ
न
जाने
किस
से
झगड़ा
कर
रहा
हूँ
बहुत
से
बंद
ताले
खुल
रहे
हैं
तिरे
सब
ख़त
इकट्ठा
कर
रहा
हूँ
कोई
तितली
निशाने
पर
नहीं
है
मैं
बस
रंगों
का
पीछा
कर
रहा
हूँ
मैं
रस्मन
कह
रहा
हूँ
फिर
मिलेंगे
ये
मत
समझो
कि
वा'दा
कर
रहा
हूँ
मिरे
अहबाब
सारे
शहर
में
हैं
मैं
अपने
गाँव
में
क्या
कर
रहा
हूँ
मिरी
हर
इक
ग़ज़ल
असली
है
साहब
कई
बरसों
से
धंदा
कर
रहा
हूँ
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Zubair Ali Tabish
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चाँद
को
दामन
में
ला
कर
रख
दिया
उसने
मेरी
गोद
में
सर
रख
दिया
आँख
में
आँसू
है
किसके
नाम
के
किसने
कश्ती
में
समुंदर
रख
दिया
वो
बताने
लग
गया
मजबूरियाँ
और
फिर
हमने
रिसीवर
रख
दिया
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Zubair Ali Tabish
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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अब
मेरे
साथ
नहीं
है
समझे
ना
समझाने
की
बात
नहीं
है
समझे
ना
तुम
माँगोगे
और
तुम्हें
मिल
जाएगा
प्यार
है
ये
ख़ैरात
नहीं
है
समझे
ना
मैं
बादल
हूँ
जिस
पर
चाहूँ
बरसूँगा
मेरी
कोई
ज़ात
नहीं
है
समझे
ना
अपना
ख़ाली
हाथ
मुझे
मत
दिखलाओ
इस
में
मेरा
हाथ
नहीं
है
समझे
ना
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Zubair Ali Tabish
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किसी
भूके
से
मत
पूछो
मोहब्बत
किस
को
कहते
हैं
कि
तुम
आँचल
बिछाओगे
वो
दस्तर-ख़्वान
समझेगा
Zubair Ali Tabish
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